फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

493 साल बाद चांदी के हिंडोले पर विराजेंगे रामलला

विज्ञापन
विज्ञापन
अयोध्या। रामनगरी के लिए यह सावन बहुत ही खास होने जा रहा है। नागपंचमी के पर्व से शुक्रवार को रामलला के दरबार में भी झूलनोत्सव की छटा बिखरने लगेगी। 493 साल के बाद रामलला पहली बार चांदी के हिंडोले पर आसीन होंगे।
विज्ञापन

श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की ओर से रामलला के लिए 21 किलो चांदी का पांच फीट ऊंचा भव्य झूला तैयार कराया गया है। जिसे गुरुवार को पूजन-अर्चन के बाद गर्भगृह में झूले को स्थापित करा दिया गया है।
रामलला सहित चारों भाई शुक्रवार से झूले पर विराजित होकर भक्तों को दर्शन देंगे। इसको लेकर रामनगरी के संत-धर्माचार्यों सहित भक्तों में खासा उत्साह है।
रामनगरी के हजारों मंदिरों में हर वर्ष श्रावण झूलनोत्सव की परंपरा का निर्वहन सदियों से होता आ रहा है। टेंट में संगीनों के साए के बीच विराजमान रहे रामलला के दरबार में भी परंपरा निर्वहन सीमित स्तर पर होता आ रहा था।
विज्ञापन

25 मार्च 2020 को रामलला अस्थाई मंदिर में विराजित हुए बावजूद इसके वे झूलनोत्सव से वंचित थे। ‘अमर उजाला’ ने एक अगस्त के अंक में ‘अस्थाई मंदिर में भी हो झूलनोत्सव की व्यवस्था...’ शीर्षक से खबर छापकर श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट का ध्यानाकर्षण किया था।
जिसके बाद श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की ओर से रामलला के लिए भव्य झूला निर्मित कराने का काम शुरू हुआ। श्रीराम जन्मभूमि के पुजारी आचार्य सत्येंद्र दास ने बताया कि यह पहली बार होगा जब रामलला के दरबार में झूलन उत्सव की धूम होगी।
नागपंचमी 13 अगस्त से भगवान श्रीरामलला भाईयों संग चांदी के झूले पर विराजमान होंगे। झूले की डोर भी चांदी की है। कहा कि, सुबह आरती, पूजन के बाद जब मंदिर खुलेगा तो रामलला चांदी के झूले पर विराजमान होकर भक्तों को दर्शन देंगे।
झूले पर एक ऊंचे आसन पर रामलला को विराजित किया जाएगा। उनके नीचे भरत, लक्ष्मण व शत्रुहन भी विराजमान होंगे। कहा कि शुक्रवार को रामलला के दरबार में झूलनोत्सव की धूम होगी, प्रतिदिन शाम को एक घंटे सांस्कृतिक कार्यक्रम भी होंगे।
ज.गु.रामदिनेशाचार्य कहते हैं कि राममंदिर निर्माण के साथ ही साथ रामनगरी का गौरव भी लौट रहा है। रामनगरी सनातन संस्कृति की संवाहक रही है। अब इसको एक नई ऊर्जा प्राप्त हो रही है। हम सबके आराध्य रामलला के दरबार में अब समय-समय पर उत्सव हो रहे हैं। हम इसके साक्षी बन रहे हैं, यह सुखद क्षण है।
महंत गिरीशपति त्रिपाठी कहते हैं कि चांदी के झूले पर विराजित रामलला का दर्शन करने की बेसब्री बयां नहीं कर सकते। श्रीराम हमारी आस्था के प्रधान केंद्र हैं। अयोध्या में अब रामभक्ति की डोर और भी मजबूत होगी। इस सुखद क्षण का आनंद कई गुना इसलिए भी बढ़ गया है कि हम इसके साक्षी बन रहे हैं।
निर्वाणी अनी अखाड़ा के महासचिव गौरीशंकर दास कहते हैं कि रामलला का भव्य राममंदिर बन रहा है। इसलिए अब अयोध्या में उत्सव ही उत्सव है। ट्रस्ट को साधुवाद है कि वह रामलला के हर उत्सव को भव्यता देने को प्रयासरत रहता है। चांदी के लिए झूले पर अपने आराध्य का दर्शन करने को आंखें बेसब्र हो रही हैं।
महंत विवेक आचारी कहते हैं कि वर्षों तक टेंट में रहें रामलला के दरबार मेें भी आध्यात्मिक वैभव की अभिव्यक्ति हो रही है। रामलला के हर उत्सव का साक्षी बनने का अवसर भक्तों को प्राप्त हो रहा है। सदियों तक हमने रामलला के पुर्नवैभव का इंतजार किया है। अब यह सुखद क्षण आ गया है तो यह हमारे लिए हर्ष और उत्सव का क्षण है।
रामलला के दरबार में अब हर उत्सव भव्यता का पर्याय होगा। इसी के तहत शुक्रवार से मंदिर परिसर में झूलनोत्सव की छटा भी बिखरेगी। भक्तों की मंशा के अनुरूप रामलला के हिलए दिल्ली से 21 किलो चांदी का पांच फीट ऊंचा झूला निर्मित कराया गया है। जो अस्थाई मंदिर में स्थापित करा दिया गया है।- चंपत राय, महासचिव, श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट

महंत गौरी शंकर दास- फोटो : FAIZABAD

21 किलो चांदी का पांच फीट ऊंचा झूला- फोटो : FAIZABAD

विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें