अयोध्या। राममंदिर निर्माण के दूसरे चरण का काम जोरों पर चल रहा है। इसके तहत 1.50 मीटर ऊंचे रॉफ्ट की ढलाई की जा रही है। रॉफ्ट का काम पूरा होने के बाद 16 फीट ऊंचे प्लिंथ का निर्माण शुरू होगा।
राममंदिर के प्लिंथ में मिर्जापुर के पत्थरों के 30 हजार ब्लॉक लगेंगे। पत्थरों की आपूर्ति का क्रम लगातार जारी है। रामजन्मभूमि परिसर में अब तक पत्थरों के एक हजार ब्लॉक आ चुके हैं।
राममंदिर का फाउंडेशन तीन चरणों में तैयार किया जाना है। पहले चरण में नींव भराई का काम पूरा हो चुका है तो दूसरे चरण में 1.50 मीटर ऊंची रॉफ्ट ढालने का काम चल रहा है।
तीसरे चरण में 16 फीट ऊंचे प्लिंथ का निर्माण कार्य होगा। इसी प्लिंथ पर ही राममंदिर का गर्भगृह आकार लेगा। रॉफ्ट की ढलाई कुल 15 ब्लॉकों में बांटकर की जा रही है।
एक अक्तूबर से शुरू हुए रॉफ्ट निर्माण के अंतर्गत अब तक पांच ब्लॉक ढाले जा चुके हैं। एक ब्लॉक को ढालने में 24 घंटे का समय लग रहा है, फिर उसे सुखाने में भी एक दिन का समय लगता है।
इस तरह एक ब्लॉक तैयार होने में दो से तीन दिन का समय लग जा रहा है। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के सदस्य डॉ. अनिल मिश्र ने बताया कि नवंबर माह से राममंदिर के प्लिंथ का निर्माण कार्य शुरू हो जाएगा।
प्लिंथ निर्माण में करीब चार महीने लग जाएंगे। 16 फीट ऊंचे प्लिंथ में मिर्जापुर व ग्रेनाइट के पत्थरों के 30 हजार ब्लॉक (पीस) लगेंगे। एक ब्लॉक का आकार चार गुणे दो फीट होगा।
फिलहाल अब तक करीब एक हजार ब्लॉक आ चुके हैं, एक ब्लॉक का वजन कम से कम एक टन है। कहा कि प्लिंथ पर ही राममंदिर का गर्भगृह आकार लेगा। योजना है कि अप्रैल 2022 से राममंदिर का गर्भगृह आकार लेना प्रारंभ हो जाए।
राममंदिर तीन मंजिला का होगा। सबसे पहले गर्भगृह का निर्माण होगा। गर्भगृह के लिए अभी तक केवल 45 हजार घनफुट पत्थर ही तैयार हैं। अभी करीब 70 हजार घनफुट पत्थरों की और जरूरत है तब जाकर गर्भगृह तैयार होगा।
मंदिर में कुल चार लाख घनफुट पत्थरों का प्रयोग होना है। ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्र ने बताया कि पत्थरों की तराशी के काम में तेजी लाने के लिए मशीनों का भी इस्तेमाल किया जाएगा, क्योंकि मैनुअली इतनी जल्दी पत्थर तराशने का काम पूरा नहीं हो सकेगी।
बताया कि मंदिर निर्माण के दूसरे चरण में भी बड़ी-बड़ी मशीनों का प्रयोग किया जा रहा है, ताकि मंदिर निर्माण का काम समयबद्ध तरीके से पूरा हो सके।