अयोध्या। विभिन्न मांगों को लेकर 23 जुलाई से आंदोलन कर रहे एंबुलेंस कर्मियों में से नौ लोगों को कार्यदायी संस्था की ओर से सस्पेंड करने का पत्र बीती रात जारी कर दिया गया। इससे कर्मचारियों का आक्रोश और बढ़ गया।
आकस्मिक सेवाओं के संचालित 12 एंबुलेंस को भी खड़ी कर दिया गया। जिससे स्वास्थ्य सेवाएं और बाधित हो गईं। दर्शननगर पुलिस चौकी पर प्रशासनिक अधिकारियों और पदाधिकारियों के मध्य घंटों चली वार्ता के बाद इमरजेंसी सेवाएं बहाल करने पर समझौता कराया गया।
बाद में एंबुलेंस कर्मचारियों ने समझौते से इंकार कर दिया। जिले में मरीजों को समय अस्पताल तक पहुंचाने के लिए संचालित 108, 102 व एएलएस एंबुलेंस के कर्मचारी विभिन्न मांगों को लेकर 23 जुलाई से दर्शननगर स्थित पौराणिक स्थल सूर्यकुंड पर धरना-प्रदर्शन कर रहे हैं।
मांगों का निस्तारण न होने पर सभी एंबुलेंस कर्मियों ने रविवार मध्य रात्रि में एंबुलेंस सूर्यकुंड परिसर में लाकर खड़ी कर दीं और अनिश्चितकालीन हड़ताल पर बैठ गए।
एकाएक एंबुलेंस सेवाएं बाधित होने से जिले में हाहाकार मच गया। इसके बाद प्रशासनिक अधिकारियों ने संगठन के पदाधिकारियों से वार्ता कर इमरजेंसी सेवाएं संचालित करने के लिए 12 एंबुलेंस चालू करने की अपील की।
जिसके क्रम में 12 एंबुलेंस पर सेवाएं बहाल की गईं और अन्य सभी एंबुलेंस सूर्यकुंड परिसर में खड़ी करके कर्मचारी हड़ताल पर रहे। इधर, हड़ताल को लेकर शासन पर स्तर पर हुई कवायद के बाद सेवा प्रदाता कंपनी ने मंगलवार रात में नौ प्रमुख पदाधिकारियों के निलंबन का पत्र जारी कर दिया।
जिससे कर्मचारी और आक्रोशित हो गए। इमरजेंसी सेवाओं के लिए संचालित 12 एंबुलेंस को भी सूर्यकुंड परिसर में खड़ी करके सभी कर्मचारी हड़ताल पर बैठ गए। इससे फिर आकस्मिक इलाज न मिल पाने की वजह से जिले में हाहाकार मच गया।
समस्याएं बढ़ने पर अपर जिलाधिकारी नगर वैभव शर्मा, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक शैलेश पांडेय, मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. अजय राजा सहित तमाम अधिकारी दर्शननगर पुलिस चौकी पहुंचे। जहां अधिकारियों व संगठन के पदाधिकारियों के मध्य घंटों वार्ता चली।
अधिकारी इमरजेंसी सेवाएं बहाल करने की अपील करते रहे और कर्मचारी निलंबन वापस लेने की मांग पर अड़े रहे। घंटों चली वार्ता के बाद अधिकारियों ने 30 एंबुलेंस आकस्मिक सेवाओं के लिए संचालित करने का दावा किया, लेकिन एंबुलेंस कर्मचारियों ने जबरदस्ती हस्ताक्षर कराने का आरोप लगाते हुए निलंबन वापस होने तक सेवाएं बहाल न करने की बात कही।
संगठन के मीडिया प्रभारी अंकित कुमार पांडेय ने बताया कि अधिकारियों के साथ सुबह से ही वार्ता चल रही थी। निलंबन वापस कराने के आश्वासन के बाद आकस्मिक सेवाएं बहाल करने की संस्तुति दी गई है।
कहा कि मरीजों को तकलीफ पहुंचाना हमारा उद्देश्य नहीं है। हम सेवाएं देने को हमेशा तत्पर हैं, लेकिन हमारी मांगों का निस्तारण न करके हमारे ऊपर कार्रवाई की जा रही है। यह निंदनीय है।
इस दौरान लोकेश कुमार अग्रहरि, पवन कुमार नंद, अखिलेश कुमार, अनिल, विपिन कुमार पांडेय, अमित वर्मा, शिव कुमार, आशीष त्रिपाठी, सचिन मिश्रा, रुद्रभान वर्मा, गणेश कुमार आदि मौजूद रहे।
मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. अजय राजा ने बताया कि प्रशासनिक अधिकारियों के साथ दर्शननगर पुलिस चौकी पर एंबुलेंस कर्मचारियों के साथ वार्ता की गई। निलंबन सेवा प्रदाता कंपनी की ओर से किया गया है।
उसमें विभाग का कोई हस्तक्षेप नहीं है। वार्ता के बाद 30 एंबुलेंस सड़क पर आ गई हैं। शेष को भी संचालित कराने के लिए वार्ता की जा रही है। जीवनदायनी स्वास्थ्य विभाग 108, 102 एंबुलेंस कर्मचारी संघ के जिलाध्यक्ष जितेंद्र कुमार पांडेय ने बताया कि प्रशासन ने दबाव बनाकर दो कर्मचारियों से समझौते पर हस्ताक्षर करा लिए हैं।
जबकि, जिला कोआर्डिनेटर अरुण चौधरी व आरएम मनीष के जरिए नौ कर्मचारियों को सेवा प्रदाता कंपनी ने निलंबित कर दिया है। जब तक सभी कर्मचारियों का निलंबन वापस नहीं होगा, तब तक एक भी एंबुलेंस सड़क पर नहीं उतरेगी। मांगों का निस्तारण होने तक हम लोग पूरी तरह हड़ताल पर रहेंगे।
एंबुलेंस कर्मचारियों की हड़ताल की वजह से आमजन को तीसरे दिन भी दिक्कतों से जूझना पड़ा। विभिन्न समस्याओं से पीड़ित तमाम लोग घंटों एंबुलेंस खोजते रहे, बाद में निराश होकर मोटर साइकिल, ई-रिक्शा व अन्य संसाधनों से अस्पताल तक पहुंचे।
महाराजगंज थाना क्षेत्र के मडना निवासी प्रानपता (65) पेट में तेज दर्द से कराह रही थीं। परिवारीजन जिला अस्पताल ले जाना चाहते थे। इसके लिए पहले एंबुलेंस के इंतजाम में जुटे।
घंटों मशक्कत के बाद पता चला कि एंबुलेंस कर्मचारी हड़ताल पर हैं तो मोटर साइकिल पर बैठाकर किसी तरह 15 किलोमीटर की दूरी तय करके जिला अस्पताल पहुंचे। यहां भी स्ट्रेचर न मिलने से गोदी में उठाकर तीमारदार इमरजेंसी तक पहुंचा तो इलाज शुरू हो सका।
महाराजा का पुरवा निवासी लक्ष्मी पाल पथरी की समस्या से कराह रही थी। काफी देर तक प्रयास के बाद एंबुलेंस की सुविधा नहीं मिल सकी तो पिता व भाई मोटर साइकिल पर बैठाकर जिला अस्पताल पहुंचे।