अयोध्या। दीपोत्सव-2021 को ऐतिहासिक बनाने की तैयारियों ने रफ्तार पकड़ ली है। इस बार दीपोत्सव की भव्यता बढ़ाने के लिए तमाम डिजिटल तरीकों का प्रयोग किया जाएगा। दीपोत्सव में जहां 7.50 लाख दीप जलाकर नया रिकॉर्ड बनाने की तैयारी है तो वहीं रामजन्मभूमि समेत रामनगरी के 22 प्रमुख मंदिरों पर भी लाखों दीपों की श्रृंखला सजेेगी। साथ ही लेजर शो, वाटर शो भी आकर्षण का केंद्र होगा। देश की लोक संस्कृति की झलक भी दिखेगी।
दीपोत्सव में पर्यटन विभाग की ओर से रामनगरी के प्रमुख 22 मंदिरों पर एक लाख से अधिक द्वीप प्रज्वलित किए जाएंगे। रामजन्मभूमि सहित कनकभवन, हनुमानगढ़ी, नागेश्वरनाथ, दशरथमहल, मणिरामदास की छावनी, भरतकुंड समेत 22 मंदिरों का चयन दीपोत्सव के लिए किया गया है। इसके अलावा दीपोत्सव में लोक संस्कृति की झलक दिखेगी।
लोक कलाकारों की कुल 30 टीमें अपना कला का हुनर दिखाएंगी। इसके लिए उत्तरप्रदेश से लोक कलाकारों की 20 व भारत के अन्य प्रांतों से 10 टीमों का चयन किया गया है। राम की पैड़ी पर 7.50 लाख दीप जलाकर नया रिकॉर्ड बनाने की योजना के साथ ही निर्माणाधीन राममंदिर की थीम, रामकथा सहित अन्य विषयों पर आधारित थीम के जरिए उत्सव की भव्यता को चार चांद लगाने की योजना है।
कठपुतली की रामलीला, छाऊ नृत्य, फरूवाही नृत्य सहित विभिन्न प्रांतों की लोककला का भी प्रदर्शन दीपोत्सव में होगा। रामराज्याभिषेक की भव्य झांकी 11 रथों पर निकाली जाएगी। इतने ही स्थानों पर सांस्कृतिक मंच सकेंगे। इन मंचों पर कलाकार अपनी प्रस्तुतियां देंगे। वहीं इस बार डिजिटल आतिशबाजी की तैयारी है ताकि प्रदूषण से बचा सके।
वाटर शो व लेजर शो के जरिए रामकथा का प्रदर्शन भी दीपोत्सव का आकर्षण बढ़ाएगा। इस बार राममंदिर व रामकथा आधारित वृहद प्रदर्शनी की भी योजना तैयार हो रही है। इस प्रदर्शनी के जरिए भक्तों को रामनगरी की पौराणिकता से भी रू-ब-रू कराने की योजना बन रही है। प्रदर्शनी में विभिन्न देशों की रामलीला सामग्रियां भी आकर्षण का केंद्र होंगी।
दीपोत्सव में इस बार विदेशी रामलीला पर कोरोना संकट के बादल मंडरा रहे हैं। संस्कृति विभाग के अनुसार श्रीलंका, रूस, थाईलैंड, इंडोनेशिया, त्रिनिडाड एवं टोबैगो की रामलीला का प्रस्ताव तैयार किया गया है लेकिन कोविड प्रोटोकॉल के तहत अनुमति मिलने पर ही रामलीला का आयोजन संभव हो सकेगा।
फिलहाल नई दिल्ली की विख्यात रामलीला कलाकारों की टीम अयोध्या में राम की गाथा का मंचन करेगी। दीपोत्सव में मुख्य अतिथि के रूप में त्रिनिडाड एवं टोबैगो के राजूदत को आमंत्रित करने की भी तैयारी चल रही है। इस बार दीपोत्सव में सरयू तट की पौराणिकता भी कार्यक्रम की शोभा बढ़ाएगी। सरयू तट व राम की पैड़ी स्थित प्राचीन, पौराणिक मंदिरों को सजाने-संवारने का काम मोजार्टों की कंपनी कर रही है।
इन मंदिरों का फसाड (अग्रभाग) दुरुस्त किया जा रहा है, ताकि इनकी प्राचीनता निखर उठे। इन मंदिरों को उनकी गरिमा के अनुसार भव्यता प्रदान की जा रही है। एक रंग में इन्हें सजाया जा रहा है। फ्रांस के आर्टिस्ट शिफूमी भी पौराणिक मंदिरों की दीवालों पर रामकथा का चित्रण कर रहे हैं, ताकि दीपोत्सव में रामायण युग जीवंत होता दिखे।