अयोध्या। जिला अस्पताल के क्षेत्रीय निदान केंद्र में खून की जांच के लिए लगी दो मशीनें पखवाड़े भर से खराब हैं। इससे पचास से अधिक प्रकार की जांचें ठप हो गई हैं। मशीनों की मरम्मत न होने से प्रतिदिन काफी संख्या में मरीजों को लौटना पड़ रहा है और निजी पैथोलॉजी में उनका शोषण हो रहा है। आए दिन इसे लेकर पंजीकरण काउंटर पर ही मरीजों व कर्मचारियों के बीच नोक-झोंक की स्थिति बनी रहती है।
जिला अस्पताल मंडल मुख्यालय का अस्पताल होने के कारण हर समय मरीजों से खचाखच भरा रहता है। भर्ती मरीजों के अलावा ओपीडी भी इन दिनों एक हजार तक पहुंच जाती है। चिकित्सकों के देखने के बाद इनकी रक्त से संबंधित जांच महिला अस्पताल परिसर के निकट स्थित क्षेत्रीय निदान केंद्र (आरडीसी) पर होती है। यहां की मशीनों के रख-रखाव व मरम्मत आदि के लिए नामित की गई संस्था की लापरवाही के कारण आए दिन दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।
करीब पंद्रह दिन से यहां स्थापित बायोकेमिस्ट्री एनालाइजर व हार्मोनल जांच की मशीन खराब हो गई है। इससे शुगर, एलएफटी, केएफटी, लिपिड प्रोफाइल, यूरिक एसिड, आरए, सीआरपी, एएसओ, थायराइड, इलेक्ट्रोलाइट, सोडियम, पोटेशियम, कैल्शियम, क्लोराइड सहित करीब पचास से अधिक प्रकार की महत्वपूर्ण जांचें नहीं हो पा रही हैं। इस समय सिर्फ सीबीसी, मलेरिया, डेंगू, टॉयफाइड, एचबीए-1 सी, एचसीवी सहित कुछ जांचें ही हो पा रही हैं।
प्रतिदिन यहां पहुंच रहे करीब सौ से अधिक मरीजों को जांचों की सुविधा न होने के कारण लौटाया जा रहा है, कुछ तो मायूस होकर लौट रहे हैं जबकि कुछ तीमारदारों की आए दिन कर्मचारियों से नोक-झोंक की नौबत तक आ जाती है। वहीं, निजी पैथोलॉजी में पहुंचने पर उनकी जेबें ढीली हो रही हैं।
शनिवार को आरडीसी आए सुभाषनगर की तबस्सुम (25) के तीमारदार मो. आरिफ, देवकाली के सुबोध कुमार, पूराबाजार से आई मधुमिता, मसौधा के बाबूराम आदि ने नाराजगी जताई। पहले इन मशीनों के संचालन की जिम्मेदारी शासन स्तर से ही पीओसीटी को सौंपी गई थी, तब मशीनों की मरम्मत 48 से 72 घंटे के अंदर हो जाती थी। इधर सायरेक्स कंपनी को कार्य आवंटित हो गया है जिसके कुछ कर्मचारी मशीन देखने आए थे लेकिन अभी तक मरम्मत नहीं हो सकी है।
जिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. सीबीएन त्रिपाठी ने बताया कि मशीनों की मरम्मत के लिए कई बार ऊपर संपर्क किया गया है, कुछ इंजीनियर आकर देख भी गए थे लेकिन मरम्मत नहीं हो सकी है। मरम्मत में करीब पंद्रह हजार तक ही खर्च आएगा लेकिन हम किसी भी मद से उसका भुगतान नहीं कर सकते हैं। इसलिए मरम्मत कराने के लिए बार-बार कहा जा रहा है। शीघ्र ही मरम्मत का आश्वासन दिया गया है।