अयोध्या। सावन झूला मेला रविवार को पूर्णिमा स्नान के साथ संपन्न हो गया। इससे पूर्व बड़ी संख्या में अयोध्या पहुंचे भक्तों ने पावन सलिला सरयू में डुबकी लगाई।
प्रशासन द्वारा भीड़ नियंत्रित करने के लिए यातायात डायवर्जन लागू किया गया था। सुरक्षा के लिए पुलिस एवं अर्द्धसैनिक बल के जवान मुस्तैद रहे। सावन पूर्णिमा को रामनगरी के मंदिरों में झूलनोत्सव का उल्लास चरम पर था।
झूलन महोत्सव के समापन की संध्या पर मंदिरों के जगमोहन में गीत-संगीत की प्रस्तुति के माध्यम से उत्सव का चरम प्रत्यक्ष दर्शित हुआ। इससे पूर्व ब्रह्म मुहूर्त से शुरू हुआ सरयू स्नान व दर्शन-पूजन का सिलसिला दिन भर जारी रहा।
सरयू स्नान के बाद भक्तों की भीड़ प्रमुख मंदिरों में दर्शन-पूजन के लिए निकल पड़ी। पहले भोले बाबा का अभिषेक, फिर हनुमानगढ़ी में विराजमान हनुमंतलला के दर्शन की होड़ सी दिखी। रामलला के दरबार में भी भक्तों का तांता लगा रहा।
कनकभवन, मणिरामदास की छावनी, दशरथ महल, श्रीरामबल्लभाकुंज जैसे मंदिरों में भी आस्था का प्रवाह दिखा। दर्शन-पूजन के बाद भक्त अपने गंतव्य को रवाना होते दिखे।
उधर सावन झूलनोत्सव की आखिरी संध्या पर रामनगरी के सैकड़ों मंदिरों में गीत-संगीत की महफिल सजी। सधे-सधाए कलाकारों ने सावन गीतों के माध्यम से अपने आराध्य के प्रति श्रद्धा निवेदित किया।
रामलला के दरबार में भी पंचमी से संचालित झूलनोत्सव का पूर्णिमा पर्व पर समापन हो गया। मुख्य अर्चक आचार्य सत्येंद्र दास ने बताया कि पूर्णिमा की शाम एक घंटे सांस्कृतिक संध्या के बाद भगवान रामलला की भोग आरती के उपरांत झूलनोत्सव को एक वर्ष के लिए विराम दे दिया गया है। वहीं रामनगरी के विअहुति भवन, सद्गुरू सदन जैसे मंदिरों में आषाढ़ शुक्ल पंचमी तक झूलनमहोत्सव का आयोजन होगा।