फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

UP : अयोध्या में मठ-मंदिर कर मुक्त, बकाया टैक्स भी माफ, नगर निगम की बोर्ड बैठक में पारित हुआ प्रस्ताव

Thu, 12 May 2022 01:10 PM IST
लखनऊ ब्यूरो अमर उजाला नेटवर्क, अयोध्या

सार

अयोध्या जोन से ही नगर निगम प्रशासन को टैक्स के रूप में ढाई करोड़ कर आमदनी होती है। बताया कि इस जोन में करीब आठ हजार मठ-मंदिर और आश्रम हैं। 95 प्रतिशत मठ-मंदिर अयोध्या जोन में ही हैं। ऐसे में अब ऐसे मठ-मंदिर, आश्रम व धर्मशाला जो अपने स्थान का व्यवसायिक प्रयोग नहीं कर रहे हैं उन्हें कर से मुक्त किया जाएगा।
विज्ञापन
अयोध्या-रामनगरी का विहंगम दृश्य। - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा अयोध्या के मठ-मंदिरों को कर मुक्त किए जाने की घोषणा को अमली जामा पहना दिया गया है। नगर निगम अयोध्या की बोर्ड की बुधवार को हुई बैठक में मठ-मंदिरों को कर मुक्त किए जाने का प्रस्ताव पारित कर दिया गया। अब मठ-मंदिरों को केवल प्रतीकात्मक टैक्स (टोकन मनी) ही देना होगा। इसके साथ ही मंदिरों का बकाया टैक्स माफ करने का भी निर्णय हुआ।
विज्ञापन


बैठक में उदया चौराहे का नाम लता मंगेश्कर के नाम पर और टेढ़ी बाजार चौराहे का नाम निषादराज के नाम पर किए जाने का प्रस्ताव भी पारित किया गया। शहर में जलभराव से निजात के लिए 182 करोड़ रुपये से नालों का निर्माण होगा। आयुक्त सभागार में बुधवार को महापौर ऋषिकेश उपाध्याय की अध्यक्षता में नगर निगम बोर्ड की बैठक की गई। लगभग तीन घंटे चली बैठक में कई अहम प्रस्ताव पारित किए गए। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की घोषणा को बैठक में अमली जामा पहना दिया गया।

बोर्ड की बैठक में अयोध्या के मठ-मंदिरों को कर मुक्त किए जाने का प्रस्ताव पारित कर दिया गया। मुख्यमंत्री ने अयोध्या के मठ-मंदिरों, आश्रम से व्यवसायिक कर न लिए जाने व केवल प्रतीकात्मक कर लिए जाने का निर्देश दिया था। इसका प्रस्ताव सदन के समक्ष रखा गया। पार्षदों ने सदन में इस पर विस्तार से चर्चा की। मेयर उपाध्याय ने स्पष्ट किया कि इस दायरे में केवल वही मठ/मंदिर/आश्रम आएंगे। जो मठ/मंदिर/आश्रम का व्यावसायिक उपयोग नहीं कर रहे हों।
विज्ञापन


पार्षदों ने नगर क्षेत्र में चल रहे सीवर के लिए खोदे मार्गों को दुरुस्त न कराए जाने का मुद्दा उठाया। इस पर महापौर ने परियोजना प्रबंधक, नगर कार्य इकाई जल निगम को निर्देश दिया कि जिन क्षेत्रों में सीवर लाइन का कार्य करा दिया गया है। पहले वहां की सड़कों की मरम्मत और गड्ढों की भराई कराने के बाद ही ही अन्य स्थलों पर कार्य शुरू किया जाए। बैठक में पिछली बैठक की कार्रवाई की पुष्टि और व वित्तीय वर्ष 2022-23 के लिए गृहकर जलकर के बिल पर 10 फीसदी छूट दिए जाने व 912 के तहत पार्षद गणों के प्रस्ताव पर चर्चा हुई।

पार्षद अशोका द्विवेदी ने गृहकर, जलकर के बिलों का वितरण जीआईएस की निर्धारित दरों के बजाए पूर्व निर्धारित दरों के अनुसार ही गृहकर, जलकर का वितरण कराने की बात रखी। नगर आयुक्त ने जीआईएस प्रणाली से किए गए करारोपण की जांच उच्च अधिकारियों के माध्यम से कराने की बात कही। जिससे किसी प्रकार की अनियमितता करारोपण के दौरान न हो।

पार्षद नीलम सिंह ने हैंडपंप खराब होने व जलापूर्ति की समस्या उठाई। लक्ष्मण घाट वार्ड के पार्षद आलोक मिश्र ने नलकूप नं.11 के खराब होने के कारण क्षेत्र में पेयजल की विकराल समस्या का मामला उठा। महापौर ने महाप्रबंधक जल को तत्काल प्रस्ताव तैयार करते हुए नगर आयुक्त के माध्यम से पत्रावली प्रस्तुत किए जाने का निर्देश दिया। पार्षद अनुभवी जायसवाल ने नगर क्षेत्र में सरकारी भूमि पर हो रहे अवैध कब्जे को हटाने व उन स्थलों पर जनहित के लिए पार्क, अस्पताल, पार्किंग आदि का निर्माण कराए जाने का प्रस्ताव सदन में रखा।

पार्षद दिनेश मौर्या ने निगम क्षेत्र में छोटे-छोटे कार्यो जैसे नाली क्रासिंग मरम्मत व जलभराव की ओर सदन का ध्यान आकृष्ट कराया। महापौर ने 15 वें वित्त आयोग के अंतर्गत प्राप्त धनराशि से सभी वार्डों में छोटे-छोटे निर्माण कार्यों यथा नाली क्रॉसिंग व पैच आदि के संबंध में मुख्य अभियंता निर्माण को सर्वे स्थानीय पार्षद से समन्वय करते हुए किए जाने का निर्देश दिये। महापौर ऋषिकेश उपाध्याय ने बताया कि शहर को जलभराव की समस्या से निजात के लिए 182 करोड़ से नाले बनाए जाएंगे। इसके लिए नगर निगम ने सर्वे करके डीपीआर प्राधिकरण को सौंप दिया है।

नालों का निर्माण प्राधिकरण कराएगा। बैठक में उपसभापति विजेंद्र सिंह, नगर आयुक्त विशाल सिंह, अपर नगर आयुक्त सच्चिदानंद सिंह, शशि भूषण राय, हरिश्चंद्र सिंह, सहायक नगर आयुक्त अंकिता शुक्ला, पार्षद बुद्धि पाल प्रजापति, अजय पांडे, विशाल पाल, कमलेश सोलंकी, अनिल सिंह, असद अहमद, जगत नरायन यादव, अनुज दास सहित अन्य पार्षद, निगम के अधिकारी कर्मचारी मौजूद रहे।

नगर निगम के महापौर ऋषिकेश उपाध्याय का कहना है कि अकेले अयोध्या जोन से ही नगर निगम प्रशासन को टैक्स के रूप में ढाई करोड़ कर आमदनी होती है। बताया कि इस जोन में करीब आठ हजार मठ-मंदिर और आश्रम हैं। 95 प्रतिशत मठ-मंदिर अयोध्या जोन में ही हैं। ऐसे में अब ऐसे मठ-मंदिर, आश्रम व धर्मशाला जो अपने स्थान का व्यवसायिक प्रयोग नहीं कर रहे हैं उन्हें कर से मुक्त किया जाएगा।

रामनगरी अयोध्या का मुख्य प्रवेश द्वार जो कि उदया चौराहा के नाम से जाता है अब यह स्वर कोकिला लता मंगेशकर के नाम से जाना जाएगा। अनुपूरक प्रस्ताव के तहत स्वर कोकिला भारत रत्न दिवंगत लता मंगेशकर के नाम अयोध्या में एक चौराहे के नामकरण का प्रस्ताव आया। इसको सदन ने सर्वसम्मति से स्वीकृति प्रदान कर दी।

उदया चौराहे को लता मंगेशकर के नाम पर कर दिया गया। यह स्थान अयोध्या-फैजाबाद की सीमा पर स्थित है। वहीं टेढ़ीबाजार चौराहे का नाम भी बदल दिया गया है। बोर्ड की बैठक में टेढ़ीबाजार चौराहे का नाम निषादराज चौराहा करने का प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित हुआ। महापौर ने बताया कि साकेतपुरी कॉलोनी में कर्पूरी ठाकुर के नाम पर एक पार्क का निर्माण भी कराया जाएगा।

राम नगरी के मठ मंदिरों को व्यावसायिक कर देने से मुक्त कर दिया गया है। उनके अब केवल केवल प्रतीकात्मक टैक्स (टोकनमनी) के रूप में एक, दो और पांच हजार रुपये लिये जाएंगे। इसके लिए महापौर ने कार्रवाई शुरू किए जाने का निर्देश दे दिया है।
विज्ञापन

निगम की ओर से जारी विज्ञप्ति में भी प्रतीकात्मक टैक्स की राशि नहीं सामने आई। लोगों में उत्सुकता हुई कि यह प्रतीकात्मक टैक्स की राशि कितनी होगी। महापौर ऋषिकेश उपाध्याय ने बताया कि प्रतीकात्मक टैक्स के रुप में केवल एक, दो और पांच हजार रुपये लिए जाएंगे।

अयोध्या से सर्वे कराया जाएगा। इस सर्वे में श्रेणी बनाई जाएगी। श्रेणी बनाए जाने के बाद संबंधित मठ मंदिर के लिए नियम के मुताबिक एक, दो और पांच हजार का टैक्स निर्धारित कर दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि इसके लिए कार्रवाई शुरू करने का निर्देश दे दिया गया है। नगर निगम से कराए जा रहे कार्यों में भ्रष्टाचार के खुलासे के बाद जनसंपर्क अधिकारी के इस्तीफे ने सवाल खड़ा कर दिया है। चर्चा है कि पीआरओ का इस्तीफा भ्रष्टाचार के खुलासे का परिणाम है।

पूर्व पीआरओ ने मेयर और नगर आयुक्त को पत्र भेजकर कई मामले उठाए। अभी पिछले दिनों पीआरओ राम किशोर यादव ने विघ्नेश्वर मंदिर के पास हैंडपंप लगाए जाने वाले स्थल का निरीक्षण के दौरान बड़ा मामला पकड़ा था। इसमें डाली जा रही पाइप और मशीनें अधोमानक पाई गई। इसकी सूचना पर हीलाहवाली के बाद जांच शुरू हुई माना जा रहा कि पीआरओ के इस्तीफे के पीछे यह बड़ा कारण हैं।

सूत्रों के मुताबिक पूर्व पीआरओ ने अपने इस्तीफे के पहले मेयर ऋषिकेश उपाध्याय और नगर आयुक्त विशाल सिंह को पत्र भेजकर कई बड़े मामले भी उठाए हैं। निगम की आर्थिक स्थिति को लेकर पार्षदों के जिस पत्र की चर्चा आई है।

उन्होंने इसके जवाब में निगम में कई कर्मचारियों को इसकी श्रेणी में बताया है। आर्थिक स्थिति व्यवस्थित करने के लिए इन पर कार्रवाई किए जाने की बात कही है। इसके साथ ही राम किशोर यादव ने मेयर और नगर आयुक्त की ईमानदार बताया।

निगम के जनसंपर्क अधिकारी राम किशोर का इस्तीफा प्रकरण भी बुधवार को सदन में उठा। मेयर ऋषिकेश उपाध्याय ने बताया कि इस्तीफे की बात नहीं, पार्षदों ने पत्र दिया था कि जनसंपर्क अधिकारी का पद समाप्त किया जाए। पीआरओ का पद शासन से स्वीकृत नहीं था। हटाए जाने से इतर जांच अधिकारी नियुक्त करने के लिए कहा गया है।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें