अयोध्या। राममंदिर का निर्माण कार्य जोरों पर चल रहा है। श्रीराम जन्मभूमि परिसर में अभी नींव के तीसरे चरण के तहत प्लिंथ ढालने का काम चल रहा है। इसी बीच मंदिर को प्राकृतिक आपदाओं से सुरक्षित रखने के लिए एक रिटेनिंग वॉल भी बनाई जा रही है।
जमीन के अंदर 12 मीटर तक गहराई तक बनने वाली इस दीवार का काम भी तेजी से चल रहा है। अब तक 60 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है। करीब छह मीटर तक वॉल को निर्माण सामग्री से भरा जा चुका है। बरसात से पहले इस काम को पूरा करने का लक्ष्य है।
श्रीराम जन्मभूमि में निर्माणाधीन राममंदिर न सिर्फ भव्यता की मिसाल हो बल्कि प्राकृतिक आपदाएं सहने की भी क्षमता वाला हो, तकनीक के मामले में भी अव्वल हो ट्रस्ट पूरी गंभीरता से इसका ध्यान रख रहा है।
राममंदिर निर्माण के कार्य में भारत के आठ नामी तकनीकी एजेंसियों की मदद ली जा रही है। राममंदिर की आधारशिला 50 फीट गहरी पत्थरों की चट्टान पर तैयार हो रही है।
श्रीराम जन्मभूमि तीर्थक्षेत्र ट्रस्ट सदस्य डॉ.अनिल मिश्र ने बताया कि मंदिर को प्राकृतिक आपदाओं से भी सुरक्षित रखने के लिए उपाय किए जा रहे हैं। मंदिर के तीन तरफ पश्चिम, दक्षिण व उत्तर दिशा में 12 मीटर गहरी एक दीवार बनाई जा रही है।
यह दीवार मंदिर को प्राकृतिक आपदाओं जैसे बाढ़, भूकंप आदि से सुरक्षित रखने में अहम भूमिका निभाएगी। पश्चिम दिशा से शुरू हुए रिटेनिंग वॉल का अब तक 60 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है।
दीवार के लिए 12 मीटर गहराई तक खोदे गए गड्ढे को छह मीटर तक निर्माण सामग्री से भरा चा चुका है। गड्ढे में भी पत्थरों की चट्टान बिछाई जा रही है। यह दीवार मंदिर को प्राकृतिक आपदा खासकर सरयू की बाढ़ से बचाने में सहायक होगी।
ट्रस्ट के सदस्य डॉ. अनिल मिश्र बताते हैं कि मंदिर परिसर में राममंदिर के अलावा अन्य प्रकल्पों के निर्माण का काम जल्द ही शुरू होगा। मंदिर की पश्चिम दिशा व पूर्व की दिशा में सड़कों का चौड़ीकरण होना है।
राममंदिर के लिए एक नया रास्ता भी सुग्रीव किला से बन रहा है। ऐसे में मंदिर परिसर के 70 एकड़ के बाहर का भी भूगोल भविष्य में बदलने जा रहा है।
कहा कि सड़कों का चौड़ीकरण या अन्य सुविधाएं विकसित करने की प्रशासन की जो योजना है। वह स्पष्ट हो जाए उसके बाद रामजन्मभूमि परिसर में बनने वाले अन्य प्रकल्पों के निर्माण की प्रक्रिया प्रारंभ की जाएगी।