परेशान विद्यार्थी छात्रवृत्ति व शुल्क प्रतिपूर्ति के लिए अफसरों का चक्कर लगा रहे हैं। उनके आधे से ज्यादा आवेदन फॉर्म तकनीकी खामियों के चलते पहले ही निरस्त हो चुके हैं।
विभाग ने तकनीकी खामियों के चलते छात्रवृत्ति से वंचित अनुसूचित जाति के छात्रों से प्रत्यावेदन भी मांगा था। लेकिन अभी इनको भी छात्रवृत्ति मिलने की खबर नहीं है।
अन्य पिछड़ा वर्ग या सामान्य वर्ग के छात्र तो निराशा के भंवरजाल में हैं। कक्षा एक से आठ तक के लिए छात्रवृत्ति पहले ही बंद की जा चुकी है। आवेदन करने वाले छात्र अपने को व्यवस्था का शिकार मानते हैं।
प्रदेश शासन से छात्रवृत्ति न मिलने से अभिभावकों में भी नाराजगी है। विभिन्न कक्षाओं में अध्ययन करने वाले छात्र-छात्राओं को सरकार से छात्रवृत्ति दिए जाने की व्यवस्था थी।
लेकिन कक्षा आठ तक के छात्रों को दी जाने वाली छात्रवृत्ति पहले ही बंद कर दी गई है। जिनको मिलती है उन छात्रों को आवेदन करने के लिए आय, जाति निवास जैसे प्रमाणपत्र के लिए भटकना पड़ता है।
इसमें धन खर्च करना पड़ता है। प्रति छात्र कई सौ रुपये का व्यय करने के वाद आवेदन हो पाता है। इसके बाद विद्यालय इसे अग्रसारित करके विभाग को भेजता है।
इसके बाद छात्रों को छात्रवृत्ति/शुल्क प्रतिपूर्ति मिल पाती है। जिले में 60 महाविद्यालय और 250 से ज्यादा माध्यमिक विद्यालय हैं। पिछले साल के आंकड़े बताते हैं कि जिले के कई हजार बच्चों को अब तक छात्रवृत्ति/शुल्क प्रतिपूर्ति नहीं मिल पाई है।
बताया जाता है कि कॉलेजों में तकनीकी शिक्षा प्राप्त करने वाले बहुत से छात्रों की शिक्षा इस पर निर्भर होती है। पिछले वित्तीय साल में दशमोत्तर छात्रवृत्ति के लिए अन्य पिछड़ा वर्ग के 43,600 छात्रों ने आवेदन किया था।
इसमें से महज 22,417 को ही अब तक छात्रवृत्ति मिल पाई है। इसी तरह अनुसूचित जाति वर्ग के लगभग 25 हजार छात्रों ने आवेदन किया था।
लेकिन इसमें से लगभग 12 हजार छात्रों को ही इसका आवंटन हो पाया है। सामान्य वर्ग के लगभग 22 हजार छात्र/छात्राओं ने दशमोत्तर छात्रवृत्ति के लिए आवेदन किया था।
लेकिन इसमें से भी महज नौ हजार छात्रों को इसका आवंटन हो पाया है।छात्रवृत्ति वितरण की नई व्यवस्था तंत्र के साथ ही छात्रों पर भारी पड़ गई है। नीति बदली तो छात्र परेशान हो गए।
भीड़ जिले पर लगती है। आवंटन शासन स्तर से आन लाइन किया जाता है। बताया गया है कि बहुत मामूली चूक पर भी छात्रों के आवेदन फार्म रिजेक्ट कर दिए गए है।
छात्रों विभाग के लोगों को घेर रहे हैं लेकिन विभाग के लोगों का कहना है कि शासन स्तर से वितरण होने के कारण उनको बहुत जानकारी नहीं होती है।
शुल्क प्रतिपूर्ति न मिलने से परेशान परमहंस शिक्षण प्रशिक्षण विद्याकुंड अयोध्या स्नातकोत्तर महाविद्यालय के बच्चों ने 9 जुलाई को कलेक्ट्रेट पहुंचकर डीएम को ज्ञापन सौंपा था।
साकेत महाविद्यालय के छात्र अनुज श्रीवास्तव व्यवस्था से पीड़ित हैं। कहते
हैं कि इंतजार करते महीनों बीत गए, लेकिन छात्रवृत्ति नहीं मिल पाई। यह
सरकार की लापरवाही है। छात्र उपेक्षित हो गए हैं।
बीए तृतीय वर्ष के छात्र आकाश पाठक कहते हैं कि उन्होंने फॉर्म भरा लेकिन
अब तक उन्हें छात्रवृत्ति नहीं मिल पाई। कहीं कोई सुनवाई भी नहीं होती है।
बनबीरपुर की प्रियंका गुप्ता कहती है कि उम्मीद थी कि छात्रवृत्ति मिलेगी।
लेकिन अब तक कुछ नहीं मिला। हम तो महज व्यवस्था के शिकार होकर रह गए।
हसनूकटरा की प्रिया सिंह कहती है कि छात्र उपेक्षा से परेशान हैं। यदि पैसा
नहीं मिलना था सैकड़ों खर्च करके फॉर्म ही क्यों भराया जाता है।
देवकाली की अनुष्का गौतम का कहना है कि छात्रवृत्ति के लिए आवेदन किया। अब
छात्राओं को सही जानकारी भी नहीं दी जा रही है कि छात्रवृत्ति क्यों नहीं
मिल रही है।
सौंदर्या श्रीवास्तव का कहना है कि छात्रवृत्ति के लिए विद्यालय के
ज्यादातर छात्र-छात्राएं परेशान हैं। सबकों उम्मीद थी कि छात्रवृत्ति
मिलेगी, लेकिन सारे काम कराए जा रहे सिर्फ छात्रवृत्ति को छोड़कर।
जिला समाज कल्याण अधिकारी राम चंद्र दूबे का कहना है कि जितने भी फॉर्म विभाग को मिले थे। वह समय पर भेज दिए गए थे। लेकिन सभी बच्चों को अब तक छात्रवृत्ति/शुल्क प्रतिपूर्ति नहीं मिल पाई है। आवेदन फॉर्म सही न भरे होने या फिर कमियों के चलते कई हजार फॉर्म रिजेक्ट हो गए हैं।