अयोध्या का होगा विकास, रामकोट का बढ़ जाएगा वैभव
अयोध्या। विवादित ढांचा ढहाए जाने के बाद अधिग्रहीत की गई 67 एकड़ भूमि वापस करने की केंद्र सरकार की याचिका सुप्रीम कोर्ट में स्वीकार हुई तो रामनगरी के विकास के साथ रामकोट का वैभव बढ़ जाएगा।
बंदिशों से रामकोट क्षेत्र वीरान सा है। आध्यात्मिक केंद्र रहे दर्जनों मंदिरों में पूजा-पाठ से लेकर आराध्य को भोग लगना तक मुश्किल है। विहिप ने मंगलवार को यहां अधिग्रहण वापस होने के बाद मिलने वाली जमीन पर रामकथा कुंज बनाने का एलान भी कर दिया।
जहां मखौड़ा में महाराजा दशरथ के पुत्रेष्टि यज्ञ से लेकर राम के स्वधाम गमन तक के 125 भव्य दृश्य बनाए जाएंगे। प्रदेश में 1991 में बनी कल्याण सिंह सरकार ने लगभग 42 एकड़ भूमि श्रीराम जन्मभूमि न्यास को रामकथा कुंज बनाने के लिए पट्टा पर दिया था।
विहिप का कहना है कि इसके अलावा भी कुछ और जमीन उसकी है। कुल जमीन लगभग 50 एकड़ है जिसका अधिग्रहण के दौरान उसने मुआवजा लेने से इन्कार कर दिया था। ऐसे में अधिग्रहण वापस होते ही वह इसकी मूल स्वामी हो जाएगी।
इसी के साथ तत्काल रामकथा कुंज का निर्माण भी शुरू हो जाएगा। यहां 1992 में विवादित ढांचा ही नहीं टूटा था, बल्कि सरकार के अधिग्रहण व बंदिशों से आध्यात्मिकता के नाभिकेंद्र रामकोट क्षेत्र की वैभवता भी प्रभावित हुई थी।
उधर, बाबरी मस्जिद/ रामजन्मभूमि विवाद का फैसला लगातार लटकने से लोगों में आक्रोश बढ़ता जा रहा है। विहिप समेत साधु-संत राममंदिर पर सरकार की चुप्पी से व्यथित हैं, धर्म सभाओं में इसका आगाज सबने देखा।
कुंभ में मंगलवार को भी संत-धर्माचार्यों ने सरकार को घेरने की तैयारी की थी। पर, मोदी सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में अधिग्रहीत 67 एकड़ जमीन वापस पाने की याचिका कर नाराज हिंदू समाज और साधु-संतों को साधने की कोशिश की है।
सियासी नजर से देखें तो इस याचिका के पीछे विश्व हिंदू परिषद को लाभ पहुंचाने और राममंदिर की शुरूआत का सरोकार भी छिपा है। याचिका में भूमि को रामजन्मभूमि न्यास को देने की मांग की गई है।
हालांकि कानून के कुछ जानकार कहते हैं कि सुप्रीम कोर्ट ने पहले ही आदेश दे रखा है कि सरकारी भूमि मंदिर-मस्जिद के लिए किसी संस्था, व्यक्ति या निजी ट्रस्ट को नहीं दी जा सकती, ऐसे में सरकार की याचिका का क्या मतलब।
सच्चाई यह है कि छह दिसंबर 1992 में बाबरी ढांचा ध्वंस के बाद कानून व्यवस्था आदि के मसले पर सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर केंद्र की नरसिंहाराव सरकार ने 67 एकड़ भूमि का अधिग्रहण कर लिया था।
बाद में संसद में अयोध्या एक्ट पारित कराकर इसका मुआवजा भी स्वामियों को देने की संस्तुति की गई। मगर विहिप के प्रभुत्व वाले रामजन्मभूमि न्यास ने मुआवजा लेने से इन्कार कर दिया। अब इसी नाते वह खुद को जमीन का मूल हकदार मान रही है।
विहिप के प्रांतीय प्रवक्ता शरद शर्मा करते हैं कि अधिग्रहण वापस होते ही रामजन्मभूमि न्यास के पास उसकी 50 एकड़ भूमि स्वत: आएगी। इस भूमि पर रामकथा कुंज बनाया जाएगा।
जिसमें मखौड़ा में महाराजा दशरथ के पुत्रेष्टि यज्ञ से लेकर लंका विजय तक के 125 दृश्य दिखाए जाएंगे। अधिग्रहण के प्रभाव से रामकोट स्थित मानस भवन, रंगमहल, रामजन्म स्थान, राम खजाना, रामनिवास मंदिर, कैकेयी कोप भवन, सीता रसोई, लवकुश मंदिर, आनंद भवन, श्रंगार भवन, कोहबर भवन, रामकृष्ण मंदिर, रंगजी का मंदिर वीरानी का दंश झेल रहे हैं।
अधिग्रहण की सख्ती से आम श्रद्धालु यहां नहीं पहुंच पाते, इससे मंदिरों में राग-भोग, आरती आदि प्रभावित हो रही है। रंगमहल के महंत रामशरण दास कहते हैं कि जैसे ही अधिग्रहण समाप्त होगा राम की अयोध्या का पुराना वैभव हासिल हो जाएगा।
रामनगरी के रामघाट क्षेत्र में एक किनारे टीन शेड में रामकथा कुंज में लगने वाली मूर्तियों को आकार देने का काम किया जा रहा है। विहिप की योजना के अनुसार अधिग्रहीत भूमि वापस होते ही यह मूर्तियां लगनी हैं।
दशरथ के पुत्रेष्टि यज्ञ एवं रामजन्म से लेकर मां सीता के धरती में समाहित होने तथा राम की जलसमाधि से स्वधाम गमन तक के पूरे सवा सौ प्रसंग मूर्तिमान होने हैं। मुख्य कारीगर रंजीत मंडल बताते हैं कि रामकथा कुंज में लगभग सवा सौ मूर्तियां की स्थापना होगी जिसमें से 30 प्रसंग तैयार किए जा चुके हैं।
सुप्रीम कोर्ट में मोदी सरकार का नया दांव राममंदिर निर्माण की अकुलाहट पर विराम लगाने की तैयारी है। सरकार बाबरी ढांचा ध्वंस के बाद अधिग्रहीत की गई 67 एकड़ भूमि पर सुप्रीम कोर्ट से यथास्थिति का आदेश वापस होते ही इसके बड़े हिस्से पर प्रस्तावित भगवान राम की 221 मीटर ऊंची मूर्ति बना सकती है।
इसके बहाने अयोध्या एक्ट को भी सरकार साधेगी। जरूरत पड़ी तो केंद्र व राज्य सरकार मिलकर संसद से पारित अयोध्या एक्ट को कुछ संशोधनों के साथ अमलीजामा पहना सकती है।
सरकार, शासन, भाजपा, विहिप और संघ के जानकार कुछ ऐसा ही इशारा कर रहे हैं। बताते हैं कि सब कुछ तय समय से आगे बढ़ा तो चुनाव से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अयोध्या आकर मूर्ति की आधारशिला रख सकते हैं।
अयोध्या के विधायक वेद प्रकाश गुप्त कहते हैं कि कुंभ में इसे लेकर भी मुख्यमंत्री के समक्ष चर्चा हुई है। सरयू किनारे डूब क्षेत्र में श्रीराम की ऊंची मूर्ति एनजीटी के नियमों से फंस सकती है। अधिग्रहीत क्षेत्र में इसे भव्य आकार मिल सकता है।
151 मीटर ऊंची मूर्ति के ऊपर 20 मीटर ऊंचा छत्र और 50 मीटर का आधार (बेस) यानि कुल ऊंचाई 221 मीटर के निर्माण में 50 मीटर बेस में अयोध्या एक्ट के तहत सर्वधर्म समभाव के भी दर्शन हो सकते हैं।
मूर्ति के पेडेस्टल (बेस) के अंदर ही भव्य म्यूजियम भी होगा, जिसमें अयोध्या का इतिहास, राम जन्मभूमि का इतिहास, भगवान विष्णु के सभी अवतारों की जानकारी भी होगी. यह दुनिया की सबसे ऊंची मूर्ति होगी।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने विवादित 2.77 एकड़ जमीन को तीन बराबर हिस्सों में बांटने का ऑर्डर दिया था। अदालत ने रामलला की मूर्ति वाली जगह रामलला विराजमान को दी।
सीता रसोई और राम चबूतरा निर्मोही अखाड़े को और बाकी हिस्सा मस्जिद निर्माण के लिए सुन्नी वक्फ बोर्ड को दिया था। बाद में तीनों पक्षों ने फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील की, जहां सुनवाई लंबित है।