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सफारी पार्क की मिट्टी का सैंपल भेजा

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इटावा। इटावा लायन सफारी पार्क का लायन पार्क खोलने की कवायद तेज हो गई है। पार्क की मिट्टी का सैंपल जांच के लिए नेशनल वर्टिकल रिसर्च इंस्टीट्यूट लखनऊ भेजा गया है।
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इंस्टीट्यूट से एक सप्ताह के भीतर सैंपल जांच रिपोर्ट आने की उम्मीद है। इसके बाद सफारी प्रशासन और सीजेडीए के अफसर तय करेंगे कि लायन पार्क कब से पर्यटकों के लिए खोला जाए, ताकि पर्यटक शेरों का दीदार कर सकें।
इटावा सफारी पार्क करीब दो साल पहले पर्यटकों लिए खोला गया था, लेकिन सबसे अधिक आकर्षण का केंद्र लायन सफारी अभी तक विधिवत तरीके नहीं खुल सका है। इससे पर्यटकों में निराशा होती है।
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अब सफारी प्रशासन पर्यटकों की निराशा को दूर करने की तैयारी कर रहा है। इसका तानाबाना भी बुन रहा है। इसके तहत लायन सफारी की मिट्टी को जांच के लिए लखनऊ के नेशनल वर्टिकल रिसर्च सेंटर (राष्ट्रीय मृदा प्रयोगशाला) में भेजा गया है।
इसके पीछे सफारी प्रशासन के मकसद मिट्टी में किसी तरह का वॉयरस है या नहीं, इसकी जानकारी जुटाना है। ताकि मिट्टी में वायरस होने की चलते शेरों की किसी तरह का नुकसान न हो और पर्यटक आराम से शेरों का दीदार कर सकें।
लायन सफारी पार्क के उप निदेशक अरुण सिंह ने बताया कि सफारी पार्क की मिट्टी का सैंपल जांच के लिए राष्ट्रीय मृदा प्रयोगशाला लखनऊ भेजा गया। इसी हफ्ते मिट्टी की जांच रिपोर्ट आने उम्मीद है।
अगर सब कुछ ठीक रहा तो रिपोर्ट के आधार पर सीजेडीए व विभाग के अधिकारियों से लायन सफारी को विधिवत तरीके से शुरू करने की अनुमति मांगी जाएगी। इनकी हरी झंडी मिलते ही लायन सफारी को पर्यटकों के लिए खोल दिया जाएगा।
350 हेक्टेयर में बना है सफारी पार्क
सफारी पार्क 350 हेक्टेयर जमीन पर बना है। इसकी खासियत है कि यहां पांच सफारी पार्क हैं, जिनमें लायन सफारी, डियर सफारी (हिरण), बेयर (भालू) सफारी और लेपर्ड (तेंदुआ) सफारी शामिल है।
लायन सफारी को अभी शुरू नहीं किया गया है। बाकी सफारी चल रहे हैं और देश-विदेश से पर्यटक यहां पशु-पक्षियों का दीदार करने के लिए बड़ी संख्या में आते हैं।
पार्क में है 18 शेर
लॉयन सफारी पार्क में इस समय 18 शेर हैं। इनमें शेरनी जेनिफर और गौरी भी हैं, जिन्हें दूसरी लहर के दौरान कोरोना संक्रमण हो गया था। दोनों को दो महीने से अधिक समय तक पार्क में बने पशु अस्पताल में भर्ती रखा गया।
वन विभाग और सफारी प्रशासन ने देश व प्रदेश के नामचीन पशु चिकित्सकों की देखरेख में दोनों शेरनियों का उपचार कराया। अब दोनों स्वस्थ हैं।
शेरों का प्रजनन केंद्र भी है
पार्क में ही बब्बर शेरों का प्रजनन केंद्र भी है। यहां कई शावकों का जन्म भी हो चुका है। प्रजनन केंद्र बनाने के पीछे शासन की मंशा रही कि सफारी पार्क में शेरों के दूसरे स्थानों से लेकर न आना पड़े।
यहां शावकों का जन्म हो और वो ही पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र बने। जरूरत होने पर शेरों को दूसरे प्रांतों व जिले के चिड़ियाघरों में भेजा जा सके।
पार्क की देखभाल को 80 से ज्यादा कर्मचारी
लॉयन सफारी पार्क में शेरों व अन्य पशु पक्षियों की देखभाल के लिए भारी-भरकम स्टाफ है। अधिकारी और कर्मचारियों को मिलाकर 80 से ज्यादा कर्मचारी यहां काम करते हैं। इनमें बड़ी संख्या आउट सोर्सिंग के कर्मचारियों की है।
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कोरोना काल के दौरान कर्मचारियों को कई महीनों तक वेतन भी नहीं मिला था। उसके बाद भी कर्मचारियों शेरों व अन्य पशु पक्षियों की सेवा में लगे रहे।
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