इटावा। सरकारी राशन की दुकान से मुफ्त राशन लेने वालों ने करीब साढ़े सात करोड़ का गेहूं सरकारी गेहूं खरीद केंद्रों पर बेच दिया। जिले में ऐसे 300 किसान रडार पर हैं। जिनके नाम ढाई लाख रुपये या इससे अधिक भुगतान हुआ है। ऐसे किसान गरीब की श्रेणी में नहीं आते, अत: उन्हें निशुल्क राशन नहीं मिल सकता है। मामले की जांच अब तहसीलदार व लेखपाल कर रहे हैं।
जिले में एक नवंबर से 28 फरवरी तक 62 खरीद केंद्रों पर गेहूं बेच लगभग 15000 किसानों ने मूल्य समर्थन योजना का लाभ लिया। किसानों को डीबीटी के माध्यम से सीधे खातों में भुगतान किया गया। गेहूं बिक्री के लिए किसानों का रजिस्ट्रेशन आधार कार्ड के जरिये से हुआ। बैंक खाते में भी आधार लिंक है। पात्र गृहस्थी योजना अथवा अन्य खाद्यान्न योजना में भी राशन का वितरण आधार लिंक करके ही किया जाता है।
आधार कार्ड के जरिये ही शासन स्तर पर हुई जांच में ये मामला सामने आया। जिसमें जिले में 300 ऐसे लोग चिह्नित किए गए, जिनको ढाई लाख रुपये से अधिक का भुगतान हुआ और वे कोरोना काल में निशुल्क राशन योजना का भी लाभ उठाते रहे। पात्र गृहस्थी योजना में उन्हीं को राशन मिल सकता है, जिनकी वार्षिक आमदनी शहरी क्षेत्र में तीन लाख और ग्रामीण क्षेत्रों में ढाई लाख रुपये हो।
जिला पूर्ति अधिकारी सीमा त्रिपाठी ने बताया कि शासन स्तर से लगभग 300 किसानों की सूची प्राप्त हुई है। इस सूची में वे नाम हैं जिन्होंने निशुल्क राशन प्राप्त किया है और सरकारी केंद्रों पर गेहूं सीमा से अधिक बेचा है। सूची को तहसीलों में जांच के लिए भेजा गया है। लेखपाल और पूूर्ति निरीक्षकों से एक सप्ताह के अंदर जांच रिपोर्ट मांगी गई है। जांच रिपोर्ट मिलने के बाद आगे की कार्यवाही की जाएगी।