जसवंतनगर। हाल ही में हुई बारिश ने आलू उत्पादक किसानों और शीतगृह मालिकों के चेहरे से चिंता की लकीरें मिटा दी हैं। किसानों का भंडारित आलू वाजिब और मुनाफे के दामों में बिकना शुरू हो गया है। कोल्ड स्टोरों में आलू सड़ने व फिंकने की संभावना भी खत्म हो गई है।
पिछले 10-12 दिनों में पुराने आलू में चार से पांच रुपये किलो भाव तक तेजी आई है। 15 दिन पहले कोल्ड स्टोरों से 53 किलो वजनी आलू का पैकेट 400 से 500 रुपये का बिक रहा था।
आज की तारीख में वही पैकेट 750 के भाव पर है। शीतगृहों में मार्च तक भंडारित आलू का 45-50 प्रतिशत ही निकला था, लेकिन बुवाई सीजन चालू होने से अब शीतगृहों से 75 प्रतिशत तक निकासी हो गई है।
अक्तूबर में अगैती आलू 15 अक्तूूबर तक बो दिया जाता है, पर बारिश होने से बुवाई बर्बाद हो गई। अभी आलू की बुवाई नवंबर के अंत तक होनी है। जसवंतनगर और सैफई 26 शीतगृह हैं। जिनमें करीब 30 लाख पैकेट आलू पिछली मार्च में भंडारित हुआ था।
अब केवल 8-10 लाख पैकिट आलू शेष है। तुलसीराम शीतगृह के मालिक सुबोध यादव, शिवा कोल्ड के राहुल गुप्ता और आत्मा राम के प्रबंधक मधुकांत मिश्रा ने बताया कि इस बार शीतगृहों से सारा आलू निकलने की संभावना है।
आलू सड़ेगा या फिंकेगा नहीं। इटावा के आलू व्यवसायी मोहम्मद इमरान और यूनुस ने बताया कि शीतगृहों में आलू की निकासी किसान जिस जोरदारी से कर रहे, उससे व्यापारियों को खरीद का अभी मौका नहीं मिल रहा है।