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ओमिक्रॉन : महिला अस्पताल में 100 बेड तैयार

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इटावा। ओमिक्रॉन वैरिएंट के आने के बाद तीसरी लहर की आशंका के मद्देनजर स्वास्थ्य विभाग ने कमर कस ली है। एक तरफ जहां सैंपलिंग व टेस्टिंग बढ़ा दी है। वहीं, जिला महिला अस्पताल में 100 बेड सुरक्षित किए गए हैं। डॉक्टरों, नर्सों व कर्मचारियों की तैनाती भी कर दी गई है। अस्पताल के ऑक्सीजन प्लांट चालू हैं।
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जिला महिला अस्पताल में 100 और उदी, बकेवर, भरथना व जसवंत नगर सीएचसी में 10-10 बेड सुरक्षित किए गए हैं। वहीं स्वास्थ्य विभाग की 21 टीमें अधिक से अधिक सैंपलिंग में लगी हैं। रेलवे, बस स्टेशनों, उच्च व तकनीकी शिक्षण संस्थानों में टीमें बाहर से आने वाले लोगों व विद्यार्थियों और कर्मचारियों के नमूने लेकर आरटीपीसीआर जांच कर रही हैं। संदिग्ध मरीजों की सैंपल जांच के लिए चिकित्सा विश्वविद्यालय सैफई भेजे जा रहे हैं।
अमर उजाला की टीम ने शनिवार को स्वास्थ्य विभाग की तैयारियों का जायजा लिया। टीम दोपहर 2:30 बजे जिला महिला अस्पताल पहुंची। अस्पताल की इमारत की दूसरी मंजिल में बनाए गए पीकू वार्ड के दरवाजे पर बाहर से कुंडी लगी थी। रिपोर्टर ने वार्ड का दरवाजा खोलकर बेड की फोटो खींची, लेकिन किसी ने टोकाटाकी नहीं है। इमारत की प्रथम तल पर कुछ कर्मचारी आपस में बातें कर रहे थे। पूछने पर बोले, हम लोग ड्यूटी पर मुस्तैद हैं, मरीज आएगा, तो डॉक्टर व नर्स भी आ जाएंगे। जिला महिला व पुरुष अस्पताल में लगा ऑक्सीजन चल रहा था। वेंटीलेटर व ऑक्सीजन कंस्टेंटर भी अस्पताल में रखे थे।
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बकेवर के संवाददाता ने क्षेत्र में बने 50 शैय्या अस्पताल का जायजा लिया। अस्पताल में 12 बेड का पीकू वार्ड बनाया गया है, लेकिन वह बंद था। जानकारी किए जाने पर बताया गया कि फार्मासिस्ट के छुट्टी पर होने की वजह से वार्ड नहीं खोला गया है। अस्पताल में लगा विधायक सावित्री कठेरिया की निधि से लगाया गया ऑक्सीजन प्लांट चल रहा था।
दोपहर: 1:48 बजे भरथना सीएचसी का रिपोर्टर ने मौके पर जाकर जायजा लिया। वहां भी 10 बेड का एक वार्ड कोरोना मरीजों के लिए तैयार था। यहां भी मरीज न होने की वजह से वार्ड का दरवाजा बंद था। पूछने पर डॉक्टर ने कहा कि वार्ड में कुत्ता या अन्य कोई जानवर न घुस जाए। इसलिए वार्ड का दरवाजा बंद रखा जाता है। जैसे ही कोई संदिग्ध मरीज आएगा, वार्ड में भर्ती कर उपचार चालू कर दिया जाएगा। ऑक्सीजन, दवाएं व स्टॉफ सब उपलब्ध है।
देश में ओमिक्रॉन वैरिएंट के मरीजों के सामने आने के बाद जिला स्वास्थ्य विभाग अलर्ट हो गया है। मरीजों के लिए जिला महिला अस्पताल में एल-वन व एल-टू के 100 बेड सुरक्षित किए गए हैं। इसमें 40 बेड का पीकू वार्ड शामिल है। जिले की चार पीएचसी में भी 10-10 बेड सुरक्षित किए गए हैं। डॉक्टर, कर्मचारी व नर्सों की ड्यूटी भी लगा दी गई है। सभी जगह पर जरूरी दवाओं के पुख्ता इंतजाम भी किए गए हैं। ग्राम स्तर पर निगरानी समितियों को भी सक्रिय किया गया है।
- डॉ. बीएल संजय, एसीएमओ, नोडल अधिकारी कोविड-19
सैफई चिकित्सा विश्वविद्यालय में चार सौ बेड सुरक्षित
सैफई स्थित चिकित्सा विश्वविद्यालय में ओमिक्रॉन वैरिंएट को ध्यान में रखकर चार सौ बेड सुरक्षित किए गए हैं। यहां तो रैन बसेरा को ही कोविड वार्ड में तब्दील कर दिया गया है। इनमें 100 बेड का पीकू वार्ड भी शामिल है। कोरोना की दूसरी लहर में यहां इतनी अधिक संख्या में मरीज आए थे कि उन्हें वार्डों की गैलरी में डॉक्टरों ने भर्ती करके उपचार किया था। विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. रमाकांत यादव का कहना है कि संभावित लहर से निपटने के लिए सभी व्यवस्थाएं कर ली गई है। डॉक्टरों, नर्सों के साथ ही कर्मचारियों की ड्यूटी लगा दी गई है।
जिला महिला अस्पताल में बनाए कोरोना व पीकू वार्ड में मरीजों के इलाज के लिए 24 डॉक्टरों की ड्यूटी लगाई गई है। इनमें सात बाल रोग विशेषज्ञ शामिल हैं। इसके अलावा 24 नर्सेंज, 18 सफाई कर्मचारी भी ड्यूटी पर लगाए गए हैं।
शहर के रोडवेज बस स्टॉप पर यात्रियों की कोरोना जांच के लिए स्वास्थ्य विभाग के दो कर्मचारी शनिवार की सुबह 10 बजे पहुंचे। वहां पर रोडवेज विभाग की तरफ मेज मुहैया न कराए जाने के चलते कर्मचारी दोपहर 12 बजे तक एक भी यात्री की जांच नहीं कर सके। जानकारी पर आरएम बीपी अग्रवाल ने स्टेशन अधीक्षक की क्लास लगाई। तब टीम को मेज मुहैया कराई और यात्रियों की कोरोना की जांच शुरू हो सकी।

जिला अस्पताल में लगा ऑक्सीजन प्लांट- फोटो : ETAWAH

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