इटावा। दो दिन से पड़ रही भीषण ठंड से जीवन अस्तव्यस्त हो गया है। हाड़कंपाऊ ठंड ने लोगों की हालत खराब कर दी है। मंगलवार को सुबह की शुरुआत घने कोहरे से हुई। कोहरा और बदली छाए रहने से वाहन सवारों को सुबह 11 बजे वाहनों की हेड लाइट जलाकर चलना पड़ा।
दोपहर ढाई बजे के बाद धूप निकली, लेकिन लोगों को गलन से कोई राहत नहीं मिल सकी। मंगलवार को न्यूनतम तापमान एक डिग्री बढ़कर छह पहुंच गया, लेकिन गलन से कोई राहत नहीं मिल सकी।
ठंड का असर दो दिन से जिला अस्पताल में भी दिखाई पड़ रहा है। मंगलवार को ओपीडी में 537 मरीज पहुंचे, जो सोमवार की अपेक्षा 317 कम थी।
पिछले कई दिनों से सुबह की शुरुआत बदली और कोहरे से होने के बाद दोपहर में एक या दो बजे के बाद निकलने वाली धूप से कुछ देर की जरूर लोगों को राहत मिल रही, लेकिन हाड़ कंपाने वाली सर्दी से राहत फिर भी मिलती दिखाई नहीं पड़ रही है।
ठंड से बच्चे, बुजुर्ग और बीमार घरों में कैद होकर रह गए हैं। दिनभर शीतलहर और गलन से परेशान लोगों को प्रशासन से भी कोई मदद नहीं मिल सकी।
शहर में दिन में एक भी स्थान पर अलाव जलवाने की व्यवस्था नहीं की गई, जबकि रात में भी अलाव जलाने की महज खानापूरी की जा रही। रात में तो नगर पालिका की टीम शहर में कई स्थानों पर गीली लकड़ियां डालकर जिम्मेदारी की खानापूरी कर लेती है।
वहीं, कई स्थानों पर जैसे ही पालिका की टीम लकड़ियां डालकर जाती है, वैसे ही कुछ लोग उठा ले जाते हैं। रात में पुलिस, होमगार्ड, पीआरडी जवान गश्त करते हैं, तो उन्हें भी अलावों से राहत नहीं मिल रही है।
इधर बाजारों में जरूरी काम से निकल रहे लोगों को भी अलावा न जलने से राहत नहीं मिल रही है। रेलवे स्टेशन, बस अड्डा, पालिका ऑफिस, दूसरे सरकारी कार्यालयों में अलाव जलवान की व्यवस्था नहीं की गई है।
कलक्ट्रेट में जरूर अलाव जलता है। शहर के प्रमुख चौराहों पर भी दिन में अलाव जलवाने की व्यवस्था नहीं की गई है। ईओ विनय कुमार मणि त्रिपाठी ने बताया कि रात में 24 स्थानों पर लकड़ियां डालीं गई थीं।
दिन में अलाव की अभी व्यवस्था नहीं की गई है, लेकिन ठंड की स्थिति को देखते हुए दिन में भी व्यवस्था की जाएगी।
पाले से फसलों को बचाना जरूरी
इन दिनों पड़ रहे पाले से फसलों को बचाना बहुत जरूरी है। हालांकि, पाले से गेहूं में फूल नहीं आने से कोई नुकसान नहीं है, लेकिन सरसों में फूल आ चुके हैं, उनमें माहू रोग के लगने की संभावना बढ़ जाए
गी। सभी फसलों को धूप की जरूरत है, लेकिन दोपहर बाद मिलने वाली धूप से कोई फायदा नहीं है। पाले से फसलों को बचाने के लिए किसानों को धुआं करने, गुड़ाई-निराई करने और सिंचाई करनी चाहिए।
पाला से सब्जियों पर भी असर पड़ने की आशंका। जो टमाटर जमीन छू रहे, उन्हें और सेम और हरी गोभी में माहू लगने की आशंका बढ़ जाएगी।
-डॉ. विजय बहादुर जायसवाल, वैज्ञानिक, कृषि विज्ञान केंद्र
हाईवे पर वाहनों की रफ्तार पर लगा ब्रेेक
चकरनगर/बकेवर/महेवा। कड़ाके की ठंड से ग्रामीण क्षेत्रों की हालत खराब है। मंगलवार को कोहरे के कारण सुबह नौ बजे तक दृश्यता बेहद कम रही। सोमवार को शाम से ही बर्फीली हवाओं के साथ कोहरे की बूंदे ने आम लोगों को घरों में कैद कर दिया।
कोहरा हल्का पड़ने से दोपहर एक बजे के बाद सूर्य देवता कुछ देर के लिए निकले, लेकिन बर्फीली हवाओं के चलते लोग गर्म कपड़ों में भी कांपते रहे। शाम ढलते ही सर्दी अपना असर दिखाना शुरू कर देती है।
सीएचसी राजपुर के वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. अवधेश यादव कहते हैं कि बीमारियों से बचने के लिए सर्दी से बचाव जरूरी है। गिरते तापमान के कारण ब्लड प्रेशर, शुगर आदि के मरीजों को बेहद सावधानी बरतना चाहिए। बच्चों को गर्म कपड़े में बर्फीली हवा से बचाव कर घरों के अंदर सुरक्षित रखें।
कोहरे और सर्दी से जनजीवन ठहरा
बकेवर। मंगलवार को सुबह से घने कोहरे और कड़ाके की ठंड से जनजीवन अस्त व्यस्त रहा। हाईवे पर वाहनों की रफ्तार कोहरे से धीमी रही। गलन से लोग दोपहिया वाहनों की अपेक्षा ऑटो व बस से सफर करते नजर आए।
सुबह घने कोहरे की वजह से ग्रामीण क्षेत्र में करीब 30 मीटर की दूर कुछ भी साफ नजर नहीं आ रहा था। कानपुर आगरा सिक्सलेन हाईवे पर वाहनों की संख्या कम दिखी।
चार पहिया वाहनों की रफ्तार कोहरे से धीमी रही। नगर पंचायत बकेवर व नगर पंचायत लखना ने सोमवार की रात व मंगलवार की सुबह अलाव जलवाए।
शीतलहर से आलू, सरसों को ज्यादा नुकसान
महेवा। विकास खंड क्षेत्र के कस्बा एवं ग्रामीण अंचलों में पांच दिन से शीतलहर व गलन से लोग बेहाल हैं। सर्दी से बचने के लिए आग जलाकर सर्दी दूर करने में लगे हुए हैं।
दुकानों के बाहर लकड़ी मंडी उझियानी एवं सब्जी मंडी के पास लोग अलाव ताप रहे हैं। एडीओ कृषि राजेश चौबे ने बताया कि शीतलहर का असर सबसे ज्यादा है। ऐसे में आलू व सरसों की फसल पर ज्यादा नुकसान है।
आलू में झुलसा रोग की आशंका
निवाड़ीकला। बीते दो दिनों से पड़ रहे पाले ने आलू किसानों की चिंता बड़ा दी है आलू में झुलसा रोग ने भी दस्तक दे दी है। इसके चलते पैदावार घटने के आसार भी बढ़ गए हैं।
इसके अलावा मटर और सरसों की फसल को भी पाला नुकसान पहुंचाता है। कृषि विशेषज्ञ देवेंद्र कुमार ने बताया कि सही तकनीकी का इस्तेमाल कर फसल को बचा सकते हैं।
बताया कि झुलसा आलू की फसल का प्रमुख रोग है, जो फफूंद से लगता है। इसके प्रमुख लक्षण नीचे की पत्तियों पर पहले तथा ऊपर की पत्तियों पर बाद में भूरे रंग की छोटे-छोटे गोल, अंडाकार या कोणीय धब्बे पड़ जाते हैं।
इसके बाद में यह आकार में बढ़कर पूरी पत्ती को ढक लेते हैं। इसकी रोकथाम के लिए डाईथेंन जेड 78 दो किलो प्रति हेक्टेयर का छिड़काव करते हैं। 10 से 12 दिन बाद इसकी पुनरावृत्ति करते हैं।
इसके अलावा फाइटोलान, विलिटेक्स 50 का 0:3 प्रतिशत का 12-15 दिन के अंतराल पर तीन बार छिड़काव करें।