सैफई। तहसील क्षेत्र के नगला पुल गांव के पास रामजानकी आश्रम में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के सातवें और अंतिम दिन कथा व्यास वीरपाल चेतन ने सुदामा चरित्र व परीक्षित मोक्ष की कथा सुनाई।
उन्होंने कहा कि सुदामा भगवान के अनन्य भक्त थे। सुदामा ने भगवान से कभी कुछ नहीं मांगा, फिर भी भगवान ने उन्हें ऐश्वर्य प्रदान किया। नवयोगेश्वर संवाद के माध्यम से भागवत धर्म का निरूपण करते हुए बताया कि भागवत धर्म सर
ल मार्ग है। भागवत धर्म है कि आप जो भी काया, मन तथा वाणी से कर्म करते हैं, उसे भगवान को समर्पित करते चलें। परीक्षित मोक्ष की कथा सुनाते हुए बताया कि शुकदेव ने राजा परीक्षित को कथा सुनाई कि तक्षक नाग आता है और परीक्षित को डंस लेता है, लेकिन भागवत कथा श्रवण के कारण उन्हें मोक्ष प्राप्त होता है।
इसके बाद भगवान इस लोक को छोड़कर अपने धाम के लिए गमन किया। उनके गमन के साथ ही यदुवंशियों का भी पतन शुरू हो गया। वह शराब में डूब गए। शराब पतन का मार्ग प्रशस्त करती है और गंगा जल उद्धार का मार्ग दिखाती है।
शास्त्री ने कहा कि कथा श्रवण जन्म-जन्मांतर के पुण्य का फल है और बड़े भाग्य से मनुष्य का तन मिलता है। कथा के समाप्ति के बाद भक्तों ने भागवत की पूजा की। भक्तों को प्रसाद वितरण किया गया।
प्रसाद वितरण करने में गुलशन, कन्हैया, यीशु, नवनीत, रवी समेत कई लोगों ने सहयोग किया।