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मासूम से दुष्कर्म में दोषी को आजीवन कारावास

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इटावा। बलरई थाना क्षेत्र के एक गांव में करीब 16 महीने पहले सात साल की मासूम से हुए दुष्कर्म के मामले में बृहस्पतिवार को अपर सत्र न्यायाधीश (पॉक्सो एक्ट) राम प्रताप सिंह राणा ने दोषी को आजीवन कारावास की सजा सुनाई।
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साथ ही 20 हजार का जुर्माना भी लगाया है। जुर्माना अदा न करने पर दोषी को एक माह की अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी। दोषी पीड़ित का रिश्ते का नाना लगता है और इस समय वह जिला कारागार में निरुद्ध है।
विशेष लोक अभियोजक (पॉक्सो एक्ट) दशरथ सिंह चौहान ने बताया कि बलरई थाना क्षेत्र के एक गांव निवासी किसान की बेटी घर के पास ही गांव के कुछ बच्चों के साथ दो जुलाई 2020 को खेल रही थी।
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दोपहर में मां ने बेटी के लोअर को खून से भीगा देखा। इसके बाद वह बेटी को एक निजी डॉक्टर के पास ले गईं। वहां उपचार कराने के बाद बेटी को वापस घर ले आई। घर में पूछने पर बच्ची ने बताया कि शिशुपाल ने उसके साथ गलत काम किया है।
उसी दिन परिजन पीड़ित बच्ची को बलरई थाने ले गए। तत्कालीन थानाध्यक्ष के सामने बच्ची ने पूरी कहानी बयां की। इसके बाद पुलिस ने बच्ची के पिता की तहरीर पर शिशुपाल के खिलाफ दुष्कर्म व पॉक्सो एक्ट के तहत मामला दर्ज किया था।
विवेचक ने विवेचना में शिशुपाल पर लगे आरोपों की सही पाया। इसके बाद विवेचक ने उसके खिलाफ कोर्ट में आरोप पत्र दाखिल किया। मामले की सुनवाई अपर सत्र न्यायाधीश (पॉक्सो एक्ट) राम प्रताप सिंह राणा की कोर्ट में चल रही थी।
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न्यायाधीश ने बचाव और वादी पक्ष के अधिवक्ताओं की दलीलों को सुना। न्यायाधीश ने मामले में दोषी शिशु पाल को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है।
इसके अलावा 20 हजार रुपये अर्थ दंड भी लगाया है। सजा सुनाए जाने के वक्त दोषी कोर्ट में मौजूद था। उसे पुलिस अभिरक्षा में जेल से पेशी पर लाया गया था।
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