इटावा। माइनिंग सर्विलांस सिस्टम योजना तहत यूपी-एमपी की सीमा पर चंबल नदी के किनारे लगाए गए हाईटेक सीसीटीवी कैमरों की मदद से खनन माफिया की गतिविधियों, अवैध खनन के परिवहन में लगे ओवरलोड वाहनों की धरपकड़ में तेजी आई है। इन हाईटेक कैमरों में निश्चित अवधि में 115 ओवरलोड और बिना प्रपत्र के खनन परिवहन में लगे वाहन कैद हो गए। सभी का पांच करोड़ से ज्यादा का चालान किया गया। वाहन मालिकों को चालान का नोटिस और मैसेज भेजा गया है। चालान राशि जमा न करने पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
इटावा के उदी क्षेत्र से सटे मध्यप्रदेश प्रदेश की सीमा से लगातार खनन के परिवहन से जुड़े ओवरलोड वाहनों के पास होने का खेल चल रहा है। मौरंग, गिट्टी, डस्ट के ओवरलोड वाहन राष्ट्रीय राजमार्ग-92 से परिवहन कर रहे हैं। खनन विभाग की टीमें लगातार आकस्मिक व रूटीन चेकिंग कर ओवरलोड वाहनों पर कार्रवाई भी करती हैं। इसके बाद भी किसी न किसी तरह खनन विभाग अधिकारियों को चकमा देकर खनन माफिया ओवरलोड व बिना रायल्टी जमा किए ही गिट्टी, मौरंग व डस्ट के वाहन पास कराते हैं।
सेटिंग-गेटिंग के खेल को रोकने के लिए अब खनन विभाग ने अपनी तीसरी आंख का इस्तेमाल प्रभावी तरीके से शुरू कर दिया है। इसी का नतीजा है कि खनन विभाग ने एक से 28 अक्तूबर के बीच 115 ओवरलोड ट्रक, डंपरों के सीसीटीवी कैमरों से ऑनलाइन चालान किए गए। वाहनों के चालान से पांच करोड़ से ज्यादा का राजस्व खनन विभाग को मिलेगा।
उदी चेक पोस्ट पर 24 घंटे चेकिंग की जाती है। बावजूद इसके कई बार ओवरलोड व बिना प्रपत्रों के खनन परिवहन से जुड़े वाहन निकल जाते थे। कुछ चालक वाहन नंबर प्लेट पर मिट्टी लगा देते हैं, जिसकी वजह से कैमरे स्कैन नहीं कर पाते हैं और वाहन आसानी से गुजर जाते है। ऐसे में विभाग को थोड़ी दिक्कत चालान करने में आ रही है। हाईटेक कैमरे लगने के बाद से इस पर अंकुश लगा है।-बृज बिहारी प्रसाद, खान निरीक्षक इटावा
उदी के पास रेडियो फ्रीक्लेंसी आइडेंटिफिकेशन डिवाइस (आरएफआईडी) सिस्टम मार्च 2021 में शुरू हुआ था। सरकार का यह सिस्टम लगाने का मकसद यहां से गुजरने वाले खनन से जुड़े वाहनों की चेकिंग में आ रही परेशानी को दूर करना था। ताकि ओवरलोड और बिना रायल्टी या फर्जी रायल्टी के कोई ट्रक नहीं गुजर सके। इस सिस्टम के तहत इटावा के एंट्री प्वाइंट पर पांच हाईटेक सीसीटीवी कैमरे लगाए गए।
ऑनलाइन निगरानी के लिए चंबल पुल पर पांच सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं। साथ ही सेंसर भी लगाए गए हैं। ट्रकों के इन हाईटेक कैमरों के सामने आते ही सारी जानकारी लखनई और जिला मुख्यालय पर मॉनीटरिंग कर रहे अधिकारियों तक पहुंच जाती है। तभी ऑनलाइन चालान हो जाता है। इस व्यवस्था से वाहन रोक कर चेकिंग करने और जाम की समस्या भी समाप्त हो गई है।
योजना में खनन विभाग को हैंड होल्ड एमचेक मशीन भी मिली है, जो वाहन पर लगे माइन टैग को दूर से ही स्कैन कर लेती है। इसके लिए वाहन को रोकने की जरूरत नहीं है। वाहन ओवरलोडिंग या अन्य नियम का उल्लंघन करता है तो इसका पता चल जाता है। इसके बाद विभाग चालान करता है। चालान की सूचना वाहन मालिक के मोबाइल पर चली जाएगी। सात दिनों में चालान की राशि जमा न करने पर मालिक को कोर्ट जाना होता है। चालान के भुगतान न होने तक वाहन का रमन्ना जारी नहीं होगा।