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मौत की अफवाह से भड़के

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भरथना। दहेज हत्या के मामले में जेल में बंद युवक की मौत के बाद उसके शव को अंतिम संस्कार के लिए ले जाने के दौरान जेल में बंद पिता की भी मौत की किसी ने अफवाह उड़ा दी।
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इससे लोगों में आक्रोश पैदा हो गया। इस पर परिजनों ने दीपक के शव को सड़क पर रखकर जाम लगा दिया, जिससे करीब आधे घंटे तक आवागमन बाधित रहा।
थाना क्षेत्र के बहारपुरा निवासी विश्वनाथ के बेटे दीपक (22) की पत्नी मेघा ने दो जनवरी को फांसी लगाकर जान दे दी थी। मेघा की मौत मामले में भरथना थाने में दहेज हत्या का मामला दर्ज कराया गया था।
जिसके तहत भरथना पुलिस ने तीन जनवरी को आरोपी दीपक व उसके पिता विश्वनाथ को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। बृहस्पतिवार को जिला जेल में बंद दीपक की मौत होने के बाद देर शाम दीपक का शव बहारपुरा स्थित उसके आवास पर लाया गया।
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शुक्रवार को दोपहर करीब 12 बजे जब दीपक का शव अंतिम संस्कार के लिए गांव के बाहर अंत्येष्टि स्थल ले जाया जा रहा था, उसी समय किसी ने अफवाह उड़ा दी कि जेल में बंद दीपक के पिता की भी मौत हो गई है।
इस पर आक्रोशित परिजनों व ग्रामीणों ने बीच रास्ते में सड़क पर शव रखकर विरोध जताने लगे।
वही मौके पर पहले से ही मौजूद एसडीएम विजय शंकर तिवारी, सीओ साधुराम, एसएसआई दीपक कुमार आदि ने स्थिति को संभालने का प्रयास किया, मगर परिजन जेल में बंद पिता को मौके पर बुलाने की बात पर अड़ गए।
इस दौरान क्षेत्रीय विधायक सावित्री कठेरिया, भाजपा जिलाध्यक्ष संजीव राजपूत, सभासद हरिओम दुबे, पूर्व ब्लॉक प्रमुख हरिओम यादव, पूर्व जिला पंचायत सदस्य मनोज यादव बंटी, अजय यादव, पालिकाध्यक्ष हाकिम सिंह, पुष्पेंद्र यादव आदि कई नेताओं ने आक्रोशित परिजनों और ग्रामीणों को समझाने का प्रयास किया।
बाद में क्षेत्राधिकारी साधुराम ने आक्रोशित परिजनों की जेल अधीक्षक के माध्यम से दीपक के पिता से फ़ोन पर बात कराई। इस पर लोग शांत हो गए। बाद में दीपक का अंतिम संस्कार कर दिया गया।
इस मामले पुलिस क्षेत्राधिकारी साधुराम ने बताया कि दीपक का शव अंत्येष्टि के लिए ले जाने के दौरान जेल में बंद पिता की मौत की झूठी खबर फैलने से परिजनों ने शव को सड़क पर रखकर जाम लगा दिया था।
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