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खाद न पानी, किसानों की यही कहानी

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इटावा/बकेवर। किसानों को सिंचाई के लिए न तो पानी मिल पा रहा और न ही फसलों की बुआई के लिए डीएपी। आखिरकार किसान क्या करें। डीजल इतना महंगा हो गया कि डीजल पंप से सिंचाई करके खेती में घाटा होगा।
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अबकी जैसे तैसे सरसों की कीमत अच्छी मिली। किसानों ने आलू के बजाय सरसों की बुआई करने का मन बनाया। अब जरूरत पड़ी तो सहकारी समितियों और सहकारी संघों पर डीएपी नहीं मिल रही है।
उधर, धान की फसल को अब आखिरी सिंचाई के लिए पानी चाहिए तो नहरों में पानी का प्रवाह बंद है। न पानी, न खाद आखिर कैसे खेती कैसे करे किसान। जिले में सरसों की बुआई का रकबा बढ़ता दिख रहा है।
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किसान राजाराम, मनोज कुमार कहते हैं तिलहन के इतिहास में अब तक अब तक सरसों (लाही) के भाव में कभी भी इतना उछाल नहीं आया। पहली बार लाही का भाव दोगुने से भी अधिक पहुंचने से किसान अब लाही की खेती की तरफ आकर्षित हो रहे हैं।
चकरनगर, बढ़पुरा में तो वैसे ही लाही की मुख्य फसल बोई जाती है। अबकी आलू वाले महेवा, लखना, बकेवर, निवाड़ीकला और भरथना क्षेत्र के किसान भी बड़ी तादाद में सरसों बोने का मन बना रहे हैं। इस समय सरसों का भाव 8 हजार रुपये प्रति क्विंटल चल रहा है।
सरकारी मूल्य पांच हजार रुपये प्रति क्विंटल है। बकेवर, कुड़रिया, सुनवर्षा, बिजौली, महेवा, लखना देहात, मड़ौली, ईकरी, विधीपुरा, नीलदेवता, नबादा, बहादुरपुर, दाऊदपुर, टकरूपुर, चिंडोली, पहाड़पुर, इकनौर, बराउख, उझियानी, बहेड़ा, उरेंग, लुधियानी आदि सहित लगभग तमाम किसान आलू की जगह सरसों की फसल बोने का मन बना रहे, जिससे इस साल समूचे बकेवर लखना क्षेत्र महेवा ब्लाक ही नहीं, बल्कि पूरे जिले में सरसों की खेती का रकबा बढ़ने की अधिक संभावना है।
सरसों का तेल उद्योग लगाने पर सब्सिडी
सरकार के वन डिस्ट्रिक वन प्रोजेक्ट के तहत सरसों को शामिल किया है। सरसों का तेल उद्योग लगाने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। जिला उद्यान अधिकारी डॉ. सुनील कुमार ने बताया कि जिले के लिए 27 सरसों आधारित सूक्ष्म उद्योग हैं।
62 पुरानी इकाइयों का उन्नयन किया जाएगा। इसमें परियोजना तैयार करने के लिए नौ जिले रिसोर्स पर्सन हैं, जो परियोजना तैयार कराएंगे pmfme.mofpi.gov.in पर पंजीकरण होगा।
अगर कोई सरसों के तेल का उद्योग स्पेलर आदि लगाना चाहता है तो उसे दस लाख तक का ऋण दिया जाएगा। जिसमें से 35 फीसदी की छूट मिलेगी।
नहरों और रजवाहों में पानी नहीं
भोगनीपुर निचली गंगा नहर और उससे निकलने वाले रजवाहों, माइनर में पानी का प्रवाह न आने से पिछेती धान की फसल को सूखने का खतरा बढ़ गया है। सिंचाई विभाग अब 15 नवंबर के बाद पानी आने की बात कह रहा है।
इस समय धान की फसल में सिंचाई की जरूरत महसूस की जा रही है। धान की फसल के लिए अंतिम सिंचाई है। फसल में बाली निकल चुकी है और बाली में दाना पड़ रहा है। बाली पकने को धान की फसल में सिंचाई की जरूरत्र होती है।
पिछले करीब एक सप्ताह से अधिक समय से इस क्षेत्र की भोगनीपुर निचली गंगा नहर में पानी का प्रवाह बंद होने से कुड़रिया, सुनवर्षा, महेवा, विधिपुरा, इंगुर्री रजवाहों व माइनरों में पानी नहीं है।
बकेवर लखना महेवा अहेरीपुर निवाड़ी कला लवेदी समूचे क्षेत्र ऐसी स्थिति में धान के किसान फसल की सिंचाई के लिए चिंतित हैं।
किसान बोले, सिंचाई के लिए पानी चाहिए
कुड़रिया, सरायमिट्ठे, बिजौली, चंदपुरा, सुनवर्षा, जैतपुरा, बेरीखेड़ा, दुर्गापुरा, इंगुर्री, धौरखा, व्यासपुरा, करौंधी, नगला कले, महिपालपुरा, फतेहपुरा, उझियानी, लुधियानी, पटिया, भरईपुर आदि सहित दर्जनों गांवों के धान किसानों महावीर प्रसाद, बंटी दुबे, पुरुषोत्तम तिवारी, संतराम, रामशरण सविता, सोनू पाल, सुबोध, गोरेलाल, मिलन तिवारी, अवनीश त्रिपाठी, राजेश त्रिपाठी, मुकेश, बादशाह का कहना है कि खेतों में खड़ी धान की फसल में सिंचाई की जरूरत है।
अगर सिंचाई नहीं हो पाई तो पैदावार पर विपरीत असर पड़ेगा। अबकी मौसम की काफी मेहरबानी रही। अब चूंकि पानी नहीं है, तो ऐसे में धान की फसल पर असर पड़ सकता है।
भोगनीपुर निचली गंगानहर के एसडीओ नवीन कुमार ने बताया कि अभी पानी आना मुश्किल है। नहर व रजवाहों की सफाई के बाद 15 नवंबर के बाद नहर में पानी आएगा।
सहकारी समितियों पर खाद का अकाल
बकेवर। सरसों की बुआई के लिए खेत में डालने के लिए डीएपी लेने सहकारी समिति पर बड़ी संख्या में किसान पहुंच रहे हैं। सरसों की बुआई चालू हो गई है। अगले माह आलू की बुआई भी शुरू हो जाएगी।
सरसों ,आलू और गेहूं की फसल के लिए किसान को डीएपी की जरूरत पड़ती है। पिछले कई दिन से सरसों की बुआई को लेकर किसान सहकारी समिति डीएपी खाद के लिए चक्कर लगा रहे हैं।
अभी सरसों के उत्पादन का लक्ष्य 16 हजार 365 हेक्टेयर मिला है। जिले में सरसों का रकबा बढ़ने की पूरी संभावना है। पिछले साल जिले में 17 हजार हेक्टेयर में सरसों का रकबा था।
वहीं, धान की पिछेती फसल में पानी की जरूरत है। पानी न मिलने से पैदावार पर कुछ विपरीत असर पड़ेगा। पिछली बार मंडलीय वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से समीक्षा में कुछ किसानों ने यह समस्या उठाई थी। सिंचाई विभाग के अधिकारियों से बात कर समस्या का निदान कराने का प्रयास किया जाएगा।
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-अभिनंदन सिंह, जिला कृषि अधिकारी
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