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ढकरा की टूटी पुलिया पर डाली गई मिट्टी, आवागान शुरू

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फोटो संख्या 21 ढकरा पुलिया में फंसी पुलिस की गाड़ी। - फोटो : ETAWAH
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चकरनगर। बाढ़ के चलते ढकरा पुलिया क्षतिग्रस्त हो गई थी। इस वजह से आवागमन अवरुद्ध हो गया था। पीडब्ल्यूडी विभाग ने शनिवार को पुलिया पर मिट्टी डालकर आवागमन की वैकल्पिक व्यवस्था की है।
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चंबल क्षेत्र का प्रमुख लखना-सिडौस मार्ग की ढकरा पुलिया वर्ष 2019 में बाढ़ के दौरान क्षतिग्रस्त हो गई थी। तब लोक निर्माण विभाग ने लकड़ी की बल्लियों के सहारे मिट्टी की बोरी लगाकर जुगाड़ से आवागमन शुरू करा दिया था।
इसके बाद किसी भी अधिकारी या जनप्रतिनिधि ने पुलिया का स्थायी निर्माण कराने की ओर ध्यान नहीं दिया। यहीं वजह रही कि इस बार बाढ़ में पुलिया क्षतिग्रस्त हो गई और एक इलाके के लोगों का आवागमन बंद हो गया।
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इस बार भी लोक निर्माण विभाग ने मिट्टी डालकर जुगाड़ू से पुलिया पर आवागमन शुरू कर दिया है। गांव के अनिल तिवारी अग्नि सिंह, विनोद, देवेंद्र दुबे, पप्पू दुबे, अखिलेश, शिवा पोरवाल और लाल सिंह गुर्जर समेत तमाम ग्रामीणों ने मुख्यमंत्री से इस पुलिया को पक्का बनवाए जाने की मांग की है।
पुलिया के क्षतिग्रस्त होने पर सबसे ज्यादा तकलीफ बीमार लोगों को होती है, जिन्हें 20 से 25 किलोमीटर का चक्कर लगाकर पुलिया वाले स्थान पर आना पड़ता है। तब उन्हें एंबुलेंस या अन्य कोई साधन उपलब्ध हो पाता है।
क्षेत्र के लोगों को हनुमंतपुरा चौराहा पहुंचने के लिए 75 से 80 किलोमीटर का चक्कर लगाना पड़ता है। पुलिया टूट जाने से व्यापारियों को सब्जी, फल, दूध आदि लेकर आने में अतिरिक्त भाड़ा वाहन चालकों को देना पड़ रहा है।
राहत सामग्री से शुरू हुई बाढ़ पीड़ितों की रसोई
चकरनगर। बाढ़ पीड़ितों की रसोई तक सरकार की तरफ से राहत सामग्री पहुंच गई है। बाढ़ में फंसे परिवारों ने अभी तक लंच पैकेट का खाना खाकर गुजारा किया। बाढ़ का पानी कम होते ही घरों में लौटे परिवार के लोगों ने साफ सफाई की।
इसके बाद महिलाओं नियमित तौर पर खाना बनाकर अपने परिवार को खिलाना शुरू कर दिया है। पीड़ित परिवार की महिलाओं ने बताया कि बताती है कि सरकार की तरफ से मिली राहत सामग्री में रसोई का सारा सामान है। इससे घर में ही खाना बनाना शुरू कर दिया है। अब बच्चों का पेट भर जाता है।
संगीता देवी बताती हैं कि बाढ़ में फंसे होने के कारण बच्चों का पेट भी नहीं भर पाता था। कई रात तो परिवार को भूखे की गुजारनी पड़ी। अब सरकार की तरफ से मिली राहत सामग्री से खाना बनाकर परिवार का पेट भर रही हैं।
ममता देवी का कहना है कि अभी प्रशासन की तरफ से मुहैया कराई गई राशन सामग्री से परिवार का पेट पाल रहे हैं। आगे मेहनत मजदूरी करके फिर गृहस्थी बसाएंगे और परिवार के अच्छे से भरण-पोषण करेंगे।

फोटो संख्या 20 बाढ़ के बाद घर पहुंचा परिवार खुले में खाना बनाती महिला।- फोटो : ETAWAH

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