सैफई। फ्रेट कॉरिडोर रेलवे ट्रैक पर ग्राम जैतिया में सोमवार शाम को हुए रेल हादसे के बाद ट्रैक बहाल करने में रेलवे ने अपनी ताकत झोंक दी है। मंगलवार सुबह रेलवे के डीजीएम और एमडी ने निरीक्षण किया।
सोमवार शाम को डीएफसी पर जोधपुर से बोकारो लाइमस्टोन लेकर जा रही मालगाड़ी के 44 डिब्बे पलट गए थे। हादसे में एक बालक की मौत हुई थी। दो बालक और महिला घायल हो गई थी।
एक माह के अंदर दूसरी बार हादसा होने से रेलवे ट्रैक बाधित हो गया। घटना के बाद मौके पर पहुंची रेलवे टीम व प्रशासनिक अधिकारियों ने राहत कार्य के साथ ही ट्रैक को बहाल करने का काम शुरू कर दिया था। बताया जा रहा है कि हादसे के समय मालगाड़ी की रफ्तार 120 किमी के आसपास थी।
हादसे की होगी टेक्निकल जांच
निरीक्षण करने पहुंचे एमडी आरके जैन ने कहा कि मालगाड़ी स्पीड से जा रही थी, ऐसे में ट्रैक पर क्या आ गया कि लोको पायलट को अचानक ब्रेक लगाना पड़ा और ट्रेन जर्क कर गई। यह टेक्निकल जांच का विषय है। लोको पायलट से बात करने के बाद ही हादसे की वजह के बारे में बताना संभव होगा। निरीक्षण के दौरान उन्होंने रेल ट्रैक को साफ करने का निर्देश दिया, जिससे यातायात जल्द से जल्द बहाल किया जा सके। अप ट्रैक जल्दी चालू होने की उम्मीद है। डाउन ट्रैक पर हादसे के बाद सही कराने व मलबा हटाने के लिए क्रेनों व कर्मचारियों को लगाया गया है।
मलबा हटने के बाद मृत बकरियां मिलीं
हादसे के बाद घटनास्थल पर सोमवार शाम से ही डिब्बों को हटाने के लिए क्रेनें व मशीनें पहुंचने लगी थीं। आगरा व कानपुर से रेलवे की क्रेन के अलावा बुलडोजर सोमवार देर रात घटनास्थल पर पहुंच गए। एक मशीन फ्रेट कॉरिडोर के कर्मचारियों तथा दूसरी इटावा से निजी कंपनी से मंगवाने के बाद मलबा हटाने का कार्य शुरू हो गया था। मलबा हटने के बाद कुछ मृत बकरियां मिलीं थीं। सुबह होते ही मलबा हटाने के काम में तेजी आई, और सबसे पहले मालगाड़ी के पलटे हुए डिब्बों को हटाने का काम शुरू किया गया।
आगरा-कानपुर के लगभग 500 कर्मचारी कार्य में लगे
जनरल मैनेजर आगरा संदीप श्रीवास्तव ने बताया कि चार टीमें कार्य में लगी हुई हैं। इनमें इलेक्ट्रीशियन, मैकेनिकल्स, इंजीनियरिंग तथा सिग्नल टीम के कर्मचारी समेत करीब 500 कर्मचारी आगरा व कानपुर के लगाए गए हैं। ट्रैक से मलबा हटाने का काम पूरा होते ही फ्रेट कॉरिडोर का ट्रैक चालू करा दिया जाएगा।
शोक में डूबा जैतिया
घटना के बाद गांव जैतिया में शोक की लहर है। मृतक बालक सचिन के माता-पिता बेसुध हैं जबकि अपना छोटा भाई खोने वाले बहन-भाई के आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे हैं। भाई-बहन सुबह-सुबक कर कह रहे हैं हमारा भाई भी बच जाता। आखिर उससे क्या गलती हो गई कि भगवान ने इतनी जल्दी उसे अपने पास बुला लिया। अब वह घर पर किसके साथ खेलेंगे।
बैरिकेडिंग होने पर बच जाती जान
ग्राम जैतिया निवासी रघुराज सिंह, हाकिम सिंह, पुष्पेंद्र पाल, शेर सिंह का कहना है कि फ्रेट कॉरिडोर ट्रैक पर बैरिकेडिंग होती तो शायद सचिन की जान बच जाती और वह आज हमारे बीच होता। न इतने लोग घायल होते। कहा कि मालगाड़ियां बहुत तेज गति से निकलती हैं, ट्रैक के किनारे बैरिकेडिंग पर ध्यान नहीं दिया गया। ग्रामीणों ने बताया करीब 15 बच्चे बकरियों को चराने के लिए गए थे। तेज आवाज के साथ जोरदार हादसे के बाद मालगाड़ी के डिब्बे पटरी से उतरने के बाद पलटी ही नहीं बल्कि उनके पहिया तक तेजी से निकल कर आए इस वजह से एक बच्चे की जान चली गई और कई लोग घायल हैं। बैरिकेडिंग होती तो शायद जनहानि को टाला जा सकता था।
मृतक बच्चे के परिवार को दी आर्थिक सहायता
फ्रेट कॉरिडोर के एक बड़े अधिकारी ने मृतक बालक के परिजनों को आर्थिक सहायता के रूप में 50 हजार रुपये दिए। हालांकि चेक के जरिये 50 हजार रुपये और दिलाने का आश्वासन दिया। यह भी बताया कि फ्रेट कॉरिडोर की ओर से मृतक के लिए 15 हजार, गंभीर घायलों को 5 हजार रुपये तथा मामूली रूप से घायलों को 500 रुपये दिए जाने का प्रावधान है।
घटना स्थल का निरीक्षण करते फ्रेट कॉरिडोर के अधिकारी- फोटो : ETAWAH
ट्रैक से वैगन को हटाती क्रेन- फोटो : ETAWAH