इटावा। एक्सप्रेस ट्रेन की चपेट में आने से अधिवक्ता राजेंद्र प्रताप मथुरिया (45) मौत हो गई। गर्दन व एक पैर धड़ से अलग हो गया। परिजन राजेंद्र की मौत की वजह हादसा बता रहे हैं। जबकि जीआरपी प्रारं भिक जांच के बाद अधिवक्ता के खुदकुशी करने की बात कह रही है। फिलहाल जीआरपी दोनों बिंदुओं पर जांच कर रही है।
अधिवक्ता राजेंद्र प्रताप भरथना के रानी नगर निवासी पुलिस विभाग के रिटायर्ड डिप्टी एसपी श्याम बाबू के बेटे थे। वकालत करने के साथ ही वह नोटरी का भी काम करते थे। राजेंद्र पत्नी रिंकी व इकलौते बेटे प्रियांशू के साथ शहर में फ्रैंडस कालोनी क्षेत्र के अजीत नगर मोहल्ले में किराए के मकान में करीब दस वर्षों से रह रहे थे।
अधिवक्ता के चचिया ससुर मुकेश ने बताया कि शुक्रवार सुबह करीब आठ बजे टहलने जाने की बात कहकर राजेंद्र घर से निकले थे। कुछ देर बाद ही जीआरपी इटावा ने परिजनों को उनकी मौत की खबर दी। बताया कि फर्रुखाबाद रेलवे फुट ओवरब्रिज के पास कानपुर से दिल्ली जा रही ट्रेन की चपेट में आने से राजेंद्र की मौत हो गई। परिजनों ने शव की पहचान की।
थोड़ी देर बाद ही पत्नी रिंकी भी बेटे के साथ मौके पर पहुंची और दहाड़े मार कर रो पड़ी। रिश्तेदार उन्हें ढांढस बंधा शांत कराने में लगे रहे। इधर, साथी की मौत की खबर पाकर तमाम अधिवक्ता भी घटनास्थल और पोस्टमार्टम हाउस पहुंचे। सभी ने भी दुखी परिजनों को सांत्वना दी।
आत्महत्या और हादसा पर टिकी जांच की सुई
परिजनों ने ट्रेन की चपेट में आने से राजेंद्र की मौत की बात कही है। वहीं, जीआरपी प्रभारी नौशाद अहमद का कहना है कि अगर राजेंद्र ट्रेन के सामने आए होते तो पायलट ट्रेन जरूर रोकता साथ ही जीआरपी थाना और रेलवे अफसरों को भी घटना की जानकारी देता।
ट्रेन के पीछे की साइड में घटना होती तो गार्ड जरूर जानकारी देते, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। प्रारंभिक जांच में आशंका जताई कि दो बोगियों के बीच में राजेंद्र चले गए। इससे गर्दन व पैर धड़ से अलग हो गए। घटना की जानकारी गार्ड व पायलट को नहीं लगी। ट्रेन बिना रुके गंतव्य को चली गई।