बकेवर। दीपावली के त्योहार को लेकर बाजार में दुकानें तो सज गई हैं, परंतु ग्राहक फिलहाल नदारद है। पहले कोरोना, फिर ऑनलाइन व्यापार और अब वायरल बुखार और डेंगू ने दिवाली के बाजार पर व्यापक असर डाला है।
दुकानदारों का कहना है कि अभी पूर्व की तुलना में अभी 20 फ़ीसदी व्यापार भी नहीं हो रहा है। कई व्यापारियों ने कम दुकानदारी की आहट से स्टॉक कम मंगाया है। चाहे इलेक्ट्रानिक की दुकान हो या बर्तन की, किराना हो या रेडीमेड, सभी व्यापारी दिवाली पर बिक्री में भारी गिरावट बता रहे हैं।
दुकानदारों का कहना है ऑनलाइन खरीदारी ने आम आदमी और किसानों की जेब खाली कर दी है। ऐसी स्थिति में वे दीपावली पर क्या खरीदारी करें। लखना कस्बे के रेडीमेड दुकानदार संतोष राठौर कहते हैं कि जहां पहले दीपावली से और 10 दिन पहले ही बाजार में अच्छी खरीदारी शुरू होती थी।
ग्राहक कपड़े खरीदते थे, लेकिन कोरोना के बाद ऑनलाइन बिक्री और अब संक्रामक बीमारियों ने पांव पसारे हैं, उससे बाजार पर काफी असर पड़ा है। स्थिति यह है कि दो हजार रुपये की भी बिक्री नहीं हो रही है।
लखना स्थित इलेक्ट्रॉनिक्स दुकान के संचालक अमित जैन कहते हैं कि अब तक मात्र पांच सौ रुपये की बिक्री नहीं हुई, जबकि दुकान में 25 से 30 लाख रुपये का माल स्टॉक में भरा पड़ा है।
दिवाली पर अमूमन किसान व सामान्य लोग कोई न कोई वस्तु बड़ी खरीदते थे, लेकिन अबकी लोग सामान का भाव पूछने भी नहीं आ रहे हैं। रेडीमेड कपड़ों की रेहड़ी लगाने वाले कपिल कुमार कहते हैं त्योहार को लेकर फुटकर मार्केट पर ज्यादा बड़ा असर नजर नहीं आ रहा है।
लोगों के अंदर स्थायी सामान न लेकर अब कामचलाऊ चीजें खरीदने की स्थितियां ज्यादा समझ में आ रही है। वह फेरी लगाकर कपड़े बेचता है। दिवाली त्योहार को देखते हुए व्यापार और बाजार की खरीदारी पर गिरावट है।
लखना कस्बे के ही किराना व्यापारी अतुल जैन बताते हैं कि चीजों के महंगी होने और लोगों के पास समय पैसा न होने का दीपावली के त्यौहार की खरीदारी पर भी असर डाल रहा है।
कहा कि लोग कमा कर लाए थे, वह कोरोना काल में खत्म हो गया। उसके बाद जो कुछ बचा संक्रामक बीमारियों के इलाज में लग गया।
इसके अलावा कोरोनाकाल में जो बाहर काम करते थे, वह लोग नौकरी छूटने के कारण घर पर आ गए, जिससे यहां पर अपना छोटा-मोटा काम शुरू किया है, इसका भी व्यापार पर असर पड़ने लगा है। दुकानें बढ़ गई हैं, खरीदारी उतनी ही हैं।
चायनीज का मुकाबला कर रहीं देसी झालरें
लवेदी। दिवाली के लिए बिजली की झालरों का बाजार सज चुका है। मोमबत्ती और दीयों का बाजार लखना में गुलजार है। दुकानदार भी पर्व पर अच्छे कारोबार की उम्मीद लगा रहे हैं।
अभी तक लखना में चाइनीज झालरों का ही कब्जा था। अबकी देसी मालाएं भी बाजार में आ चुकी हैं। देश में निर्मित बिजली की झालरें जहां 100 से लेकर 300 रुपये तक की रेंज में मौजूद हैं, वहीं चायनीज मालाएं 20 से लेकर 700 रुपये तक की रेंज में उपलब्ध हैं।
कारोबारी राहुल जैन ने कहा कि भारतीय कंपनियों ने अब चायनीज माल को टक्कर देने के लिए देसी मालाओं को बाजार में कई बैरायटी उतारी हैं।
मिठाइयों में हो रही मिलावट
बकेवर। दीपावली नजदीक आते ही लखना और बकेवर में मिलावट खोर सक्रिय हो गए हैं। बाजार में बिक रहे मिलावटी खोया, मैदा, दालमोंठ और दूध की मिठाइयां कभी भी बीमार कर सकती हैं।
अभी तक खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम ने लखना में तीन और बकेवर में मिठाई के दो सैंपल के सिवा कोई कार्रवाई शुरू नहीं की है। वहीं, खाद्य निरीक्षक शैलेंद्र के नेतृत्व में मिलावट खोरों के विरुद्ध अभियान शुरू कर दिया गया है।
दिवाली पर पारंपरिक तोहफों की बढ़ी डिमांड
बकेवर। दीपोत्सव को लेकर बाजार गुलजार हो गए हैं। रंग-पेंट से लेकर गिफ्ट के सामान तक की दुकानों पर खरीदार पहुंच रहे हैं। पारंपरिक तोहफों की भी डिमांड बढ़ गई है। मोमबत्ती व लक्ष्मी-गणेश की मूर्तियों व मिट्टी के बर्तन के भी बाजार सज गए हैं।
दीपावली पर गिफ्ट देने के बढ़ते ट्रेंड ने लोगों की पसंद भी बदली है। जहां कुछ लोग गिफ्ट देना ज्यादा पसंद कर रहे हैं। दीपावली मग, फ्लोटिग कैंडल, फ्लावर पार्ट्स, क्रिस्टल गिफ्ट आइटम, सीनरी शोपीस, फ्लोटिंग दीया, विग चैंस, लाफिग बुद्धा जैसे आइटम ज्यादा पसंद किए जा रहे हैं।
वहीं बाजारों में दीये, बाती, मोमबत्ती, लक्ष्मी-गणेश और मूर्तियों के बाजार सज गए हैं। कृत्रिम फूल-माला, रंगोली, की दुकानों पर लोगों की भीड़ शुरू हो गई है।