इटावा। इसे संयोग ही कहा जाएगा कि जब-जब भाजपा इटावा सदर सीट जीती तब प्रदेश में उसकी ही सरकार बनी है। पहली बार 1991 में सदर सीट से भाजपा प्रत्याशी अशोक दुबे निर्वाचित हुए थे, उस समय प्रदेश में कल्याण सिंह के नेतृत्व में पहली बार भाजपा की सरकार गठित हुई थी।
दूसरी बार 2017 में हुए विधानसभा चुनाव में सदर सीट से सरिता भदौरिया पहली बार चुनाव जीतीं थीं, तब फिर से प्रदेश में दूसरी बार बनी भाजपा सरकार में योगी आदित्यनाथ को मुख्यमंत्री बने।
अब तीसरी व लगातार दूसरी बार सदर सीट पर फिर से भाजपा से सरिता भदौरिया निर्वाचित हुईं। इस बार भी सूबे में भाजपा के सत्तासीन होना तय है।
गौर करने वाली बात यह है कि 1991 व 2017 के विधानसभा चुनाव में भाजपा जिले में दो-दो सीटें जीतीं थीं। लेकिन इस बार मात्र एक सदर सीट पर ही जीत मिल सकी है। 1991 में पहली बार भाजपा ने उस समय जिले की चार में से दो सीटें इटावा सदर से अशोक दुबे व लखना सुरक्षित (अब समाप्त) से केके राज चुनाव जीते थे।
2017 के विधानसभा चुनाव में जनपद की तीन में से दो सीटें इटावा सदर से सरिता भदौरिया व भरथना सुरक्षित से सावित्री कठेरिया पहली बार विजयी हुईं थीं। सरिता भदौरिया सदर सीट पर भाजपा को लगातार दूसरी बार जीत दिलाने वाली एक मात्र विधायक भी बन गई हैं।