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कृषि कानूनों से देश की अर्थव्यवस्था को नुकसान: पी. कृष्ण प्रसाद

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भरथना। कृषि कानूनों से केवल खेती और किसानों का नहीं, देश की पूरी अर्थव्यवस्था को नुकसान होगा। किसान संयुक्त मोर्चा ने तय किया है जब तक कृषि कानून वापस नहीं होते, आंदोलन जारी रहेगा।
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रविवार को अखिल भारतीय किसान सभा के राष्ट्रीय वित्त सचिव पी. कृष्ण प्रसाद ने ऊमरसेंडा में किसान सभा भरथना की विस्तारित बैठक को संबोधित करते हुए यह बातें कहीं।
बैठक में किसान नेता राम प्रकाश पोरवाल ने जिले में खाद की किल्लत, कालाबाजारी व धान को सरकारी रेट पर बिकवाने की मांग की। वीरेंद्र सिंह यादव, आपेंद्र कुमार प्रधान, शिवराम सिंह, राम प्रकाश यादव, दुर्ग विजय सिंह शाक्य ने भी संबोधित किया।
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अध्यक्षता लाल सिंह यादव व संचालन अनिल दीक्षित ने किया। बैठक में 26 अक्तूबर को लखनऊ रैली में बड़ी संख्या में भाग लेने पर सहमति बनी। ऊसराहार संवाद प्रतिनिधि के अनुसार पी. कृष्ण प्रसाद ने सभा के कार्यकर्ताओं को भरतिया चौराहा स्थित मैरिज होम में संबोधित किया।
उन्होंने कहा पूंजीवादी शासन में गरीब जनता का शोषण होता है। मजदूर, किसान के राज बिना यह वर्ग सुखी नहीं हो सकता। नारा दिया हर गांव में किसान सभा, किसान सभा में हर किसान।
किसान सभा के महामंत्री मुकुट सिंह ने कहा कि इटावा में कोई धान खरीद केंद्र शुरू नहीं हुआ है। पूर्व जिलाध्यक्ष विश्राम सिंह ने कहा कि कार्यकर्ताओं के खिलाफ पुलिस की दमनात्मक कार्रवाई बर्दाश्त नहीं होगी। अध्यक्षता वैद्य विश्राम सिंह ने की।
इटावा। पत्रकार वार्ता में पी. कृष्ण प्रसाद ने कहा कि भाजपा सरकारें किसान आंदोलन से भयभीत हैं। इसलिए किसानों की हत्याओं, दमन, अवैध नजरबंदी और शांतिपूर्ण आंदोलन पर रोक जैसे हथकंडे अपना रही हैं।
किसानों के सामने करो या मरो के अलावा कोई रास्ता नहीं बचा है। आंदोलन कृषि कानूनों की वापसी, बिजली बिल, पराली जुर्माना रद्द करने, एमएसपी की कानूनी गारंटी, लखीमपुर हत्याकांड के साजिशकर्ता गृह राज्यमंत्री की बर्खास्तगी और गिरफ्तारी तक थमने वाला नहीं है।
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उन्होंने मौजूदा कृषि संकट के लिए मोदी सरकार की कारपोरेटपरस्त आर्थिक नीतियों को जिम्मेदार ठहराया।
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