यहां से स्वास्थ्य लाभ मिलने पर घर ले गए थे। मेडिकल कॉलेज की ही दवाएं चल रही थी। बताया कि सिर में चोटें आने से तनाव में रहते थे किसी से कुछ कहते भी नहीं थे। बुधवार की सुबह करीब 7.00 बजे छोटा भाई अजीत चाय लेकर गया था, तब कमरे अंदर से बंद मिला, जबकि अन्य दिनों में सुबह ही कमरा खो दिया जाता था।
दरवाजा बंद होने पर आवाज लगाई तो कोई हरकत अंदर से नहीं हुई, तब खिड़की से झांक कर देखा गया तो रस्सी के फंदा पर लटके पाए गए। इसके बाद पुलिस को सूचना दी गई। प्रभारी निरीक्षक देवेंद्र नाथ मिश्रा ने बताया कि युवक ने फंदा लगाकर आत्महत्या की है। शव का पोस्टमार्टम कराकर परिजन को सौंप दिया है।
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10 साल की उम्र में ही आ गया था बहन के घर
भांजे भूप सिंह ने बताया कि पूरन सिंह 10 साल की उम्र से ही अपनी बहन रेशमा देवी के घर आ गया था। हमारे घर पर ही आगे का पालन पोषण हुआ। इसके बाद जब समझादार हो गए तो दिल्ली में ही मजदूरी करने लगे। वहां से जब भी आते थे तो हमारे ही गांव में आकर रुकते थे।
नागपुर की महिला से की थी शादी
पूरन सिंह करीब 15 साल पहले महाराष्ट्र स्थित नागपुर में मजदूरी करने के लिए गया था, यहां एक महिला से नजदीकियां बढ़ी तो उससे शादी की थी। जो एक वर्ष बाद ही साथ छोड़कर चली गई। तब से अकेले ही रहकर जिंदगी गुजार रहे थे, खुद को केंसर होना भी बताते थे।