नायब सूबेदार राजवीर सिंह फाइल फोटो ।संवाद
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एटा/ राजा का रामपुर। अपने अदम्य साहस और युद्ध कौशल के बल पर दुश्मनों के दांत खट्टे कर देने वाले सेना के नायब सूबेदार और वीर चक्र से सम्मानित राजवीर सिंह का लंबी बीमारी के बाद सोमवार को 91 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। उनका अंतिम संस्कार मंगलवार को किया जाएगा।
तहसील अलीगंज क्षेत्र के कस्बा राजा का रामपुर स्थित गांव गढ़िया जगन्नाथ निवासी नायब सूबेदार राजवीर सिंह छह दिसंबर 1965 को राजपूत रेजीमेंट की राइफल कंपनी की प्लाटून का नेतृत्व कर रहे थे।
तभी कंपनी को भारत-पाकिस्तान सीमा पर स्थित दुश्मन की चौकियों पर कब्जा करने का काम सौंपा गया। इस दौरान दुश्मनों की जबरदस्त गोलीबारी से कंपनी आगे नहीं बढ़ पा रही थी। इस दौरान सीधे एक गोली राजवीर सिंह को भी लगी।
हालांकि इसके बावजूद उन्होंने रिठम प्रोजेक्टर उठाया और दुश्मन के टैंकों पर गोलीबारी शुरू कर दी और लक्ष्य की प्राप्ति की। युद्ध के बाद भारत सरकार ने उन्हें छह सितंबर 1966 को वीर चक्र से सम्मानित किया।
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नहीं है कोई संतान
राजवीर सिंह को एक पुत्र हुआ था लेकिन पैदा होने के कुछ दिन बाद ही उसका निधन हो गया। इसके बाद से उनके कोई संतान नहीं हुई।
बता दें कि छह माह पूर्व गिरने से राजवीर सिंह को कूल्हे में फ्रैक्चर हो गया था। उनका इलाज चल रहा था। उपचार के दौरान ही सोमवार को उन्होंने अपने घर में ही अंतिम सांस ली।
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