मैटरनिटी विंग में मॉकड्रिल के दौरान आभासी मरीज को दिए जा रहे इलाज की जानकारी करते जेडी डॉ. एमएल अग?
- फोटो : ETAH
एटा। तीसरी लहर से निपटने के लिए शुक्रवार को पीकू (पीडियाट्रिक इंटेसिव केयर यूनिट) की व्यवस्थाओं को परखा गया। जिला मुख्यालय सहित पांच स्थानों पर मॉकड्रिल कर मरीज के आने से लेकर गंभीर हालत में उसके उपचार तक का पूरा रिहर्सल चिकित्सकों व कर्मचारियों को कराया गया। मैटरनिटी विंग में एंबुलेंस से पहुंचे बाल रोगी को दो मिनट में स्ट्रेचर से पीडियाट्रिक वार्ड में लाकर भर्ती कराया गया। जबकि तीसरे मिनट में उसे ऑक्सीजन दे दी गई।
जिला मुख्यालय स्थित मेडिकल कॉलेज के अंतर्गत मैटरनिटी विंग में पीकू वार्ड में यह मॉकड्रिल अलीगढ़ से आए जेडी स्वास्थ्य डॉ. एमएल अग्रवाल की मौजूदगी में हुआ। दोपहर 1.13 मिनट पर आभासी मरीज के रूप में एक बालक को एंबुलेंस से मैटरनिटी विंग पहुंचाया गया। पहले से तैयार स्ट्रेचर पर लिटाकर कर्मचारी उसे लेकर तीसरी मंजिल पर बनाए गए पीकू वार्ड में पहुंचे और बेड पर लिटाया गया। इसमें करीब दो मिनट का समय लगा। 1.16 मिनट पर उसे ऑक्सीजन लगा दी गई। साथ ही मल्टी पैरा मॉनीटर के माध्यम से उसका बीपी, पल्स रेट आदि देखे गए। पीकू के प्रभारी डॉ. एबी शर्मा ने बताया कि वेंटीलेटर पूरी तरह से तैयार है, जरूरत होते ही मरीज को वेंटीलेटर पर लेने की व्यवस्था है।
इन अस्पतालों में भी हुआ मॉकड्रिल
मैटरनिटी विंग के अलावा कोविड अस्पताल बागवाला, चुरथरा, सकीट और जैथरा में बनाए गए पीकू वार्ड में भी मॉकड्रिल किया गया। सीएमओ डॉ. उमेेश त्रिपाठी ने बताया कि सभी स्थानों पर मॉकड्रिल प्रक्रिया ठीक प्रकार से की गई है।
पिछले मॉकड्रिल में रहीं थीं खामियां
इससे पहले 27 अगस्त को भी एक मॉकड्रिल कराया जा चुका है। मैटरनिटी विंग में ही एंबुलेंस पहुंचने के 15 मिनट तक बाल रोगी को स्ट्रेचर नहीं मिला था। वहीं कर्मचारी वेंटीलेटर के संचालन की सही जानकारी नहीं दे सके। वहीं चिकित्सक भी इलाज के सवालों पर लड़खड़ाते नजर आए थे।