स्टाफ नर्स गार्गी ने आत्महत्या से एक दिन पहले ही अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर दुख भरी रील पोस्ट की। रील में गाना लगाया कौन सुने और किसे सुनाऊं मन में समझ-समझ रह जाऊं। इसमें लिखा था अब किसी को नहीं सुनना, मेरी दुनिया लुट गई।
आत्महत्या से एक दिन पहले ही गार्गी ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर दुख भरी रील पोस्ट की थी। इसमें लिखा कि अब किसी को नहीं सुनना, मेरी दुनिया लुट गई। जबकि गाना लगाया-कौन सुने और किसे सुनाऊं मन में समझ-समझ रह जाऊं।
विज्ञापन
मेडिकल कॉलेज में बतौर स्टाफ नर्स के रूप में गार्गी को करीब दो वर्ष पहले अवनि परिधि एजेंसी के माध्यम से तैनाती मिली थी। तभी से वह यहां शहर में अलग-अलग मोहल्लों में किराए पर रहकर नौकरी करती आ रही थी। मोहल्ला श्याम नगर जाटवपुरा में दो माह पहले ही किराए का कमरा लिया था।
यहां अक्सर शांत रहा करती थी और किसी से ज्यादा बात भी नहीं करती थी। एक दिन पहले ही सोशल साइट इंस्टाग्राम पर डाली गई रील से जाहिर हो रहा है कि वह बेहद तनाव और अवसाद में थी।
विज्ञापन
रील में अन्य स्टाफ नर्स का भी फोटो शेयर किया है। वहीं चार दिन पहले डाली गई रील में लिखा है, वो दिन निकल गए जब हम किसी के आने पर खुद को सजा देते थे, अब कोई फर्क नहीं पड़ा। इससे पहले भी रील डाली। इसमें लिखा कि मुझे ना फिर से वो गलती नहीं दोहरानी जो हम कर चुके हैं, अकेले ही अच्छे हैं।
गार्गी ने 23 दिसंबर को डाली रील में गाना लगाया, तेरी राहे देखते देखते ही, सांसों की..., इससे पहले एक रील में लिखा है कि कल तक जो अपना कहा करते थे वो आज पराए से भी कहीं ज्यादा बेहतर हो गए।
गाना लगाया कि तेरी बेवफाई का यह गम भी उठाऊंगा, तूने किया जो मैं न किसी को बताऊंगा। सोशल मीडिया पर गार्गी की ओर से किए गए पोस्ट उसकी निजी जिंदगी से ताल्लुक रखते हैं। दोनों के प्यार के बीच में कई उतार चढ़ाव आए हैं जो उसने शेयर किए हैं।
शनिवार रात 8 बजे ड्यूटी खत्म कर रविवार सुबह 4 बजे पहुंची कमरे
एटा में मेडिकल कॉलेज के सीएमएस नीरज अग्रवाल ने बताया कि स्टाफ नर्स की मौत होने की जानकारी पर डयूटी के बारे में पता कराया गया। तब सामने आया कि गार्गी यादव शनिवार की शाम डयूटी करके 8 बजे चली गई थी। इसके बाद क्या हुआ, किसी को कुछ नहीं पता। वहीं मकान मालिक दीपक गुप्ता का कहना है कि रविवार तड़के 4 बजे वह मकान पर आई थी। तब अकेली थी। पत्नी ने दरवाजा खोला और वह सीधे दूसरी मंजिल पर बने कमरे में चली गई।
मकान स्वामी के अनुसार दो माह पहले ही गार्गी के माता-पिता मकान देखने आए थे, इसके बाद ही कमरा दिया गया था। वह डयूटी से आने के बाद सीधी कमरे में चली जाती थी और दरवाजा बंद कर लेती थी। किसी से बात भी नहीं करती थी। रविवार सुबह 4 बजे पहली बार डयूटी से लौटने की बात बताई थी।
अकेली आई और हमेशा की तरह कमरे में चली गई। युवक कब कमरे में आया, जानकारी नहीं हो सकी। बताया कि ऊपरी मंजिल पर जाने के लिए एक सीढि़यों का रास्ता बाहर से है, जबकि दूसरा अंदर है। इससे हम लोग आते-जाते हैं। अंदर वाले रास्ते से ही पत्नी ने गार्गी को मकान में प्रवेश दिया था। जबकि युवक बाहर की सीढ़ियों से ऊपर गया होगा।