आबकारी विभाग के अधिकारी नियम कानून को ताक पर रख सरकारी खजाना भरने में लगे हैं। फिर चाहे किसी की धार्मिक भावनाएं आहत हों या बच्चों और युवकों के मन पर विपरीत असर पड़े। विभाग के अधिकारियों न तो मंदिर-मस्जिद की परवाह है और न ही अस्पतालों और शिक्षण संस्थानों की। अधिकारियों से सांठगांठ कर ठेका लेने वालों ने जहां चाहा वहीं देशी, अंग्रेजी, बीयर और भांग का ठेका खोल दिया, लेकिन विभागीय और जिला प्रशासन मूकदर्शक बना हुआ है।
प्रदेश सरकार के खजाने के लिए एटा जिले से हर साल 125 करोड़ रुपये कमाने वाला आबकारी विभाग ने मार्च में 214 पुराने देशी और अंग्रेजी शराब ठेकों का नवीनीकरण किया, जबकि 24 अंग्रेजी और देशी शराब के नए ठेके खोले। मार्च में इस बार बीयर और भांग के ठेकों में कोई बढ़ोत्तरी नहीं हुई। लेकिन शराब ठेकेदारों ने विभागीय अफसरों से मिलीभगत कर जहां चाहा वहां दुकानें खोल दीं। मलिन बस्तियों, लाइब्रेरी, पार्क, अस्पताल, मंदिर, मस्जिद को भी नहीं छोड़ा। आलम यह है कि लाइब्रेरी और स्कूल जाने वाले रास्तों पर शराब ठेके होने के कारण नशे धुत्त लोग स्कूली बच्चों और छात्राओं पर फब्तियां कसते दिखाई देते हैं और तो और जिले की कई मलिन बस्तियों के आसपास देशी शराब के ठेके खुले हैं।
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जिले में इतने हैं शराब के ठेके
शराब की किस्म ठेकों की संख्या
देशी शराब 186
अंग्रेजी शराब 052
बीयर शॉप 036
भांग ठेका 014
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ये हैं शराब ठेके खोलने के नियम
आबकारी नियम के तहत धार्मिक स्थल, स्कूल, लाइब्रेरी, मंदिर, हॉस्पिटल से बार, शराब, भांग, बीयर की दुकान कम से कम 50 मीटर दूर हो। पहले यह दूरी उपरोक्त स्थानों से 100 मीटर थी। नियम के तहत मलिन बस्ती में शराब की दुकान नहीं खुलेगी, लेकिन जिले में कई स्थानों पर इसका उल्लंघन हो रहा है। नियम के मुताबिक मॉडल शॉप, शराब ठेका और बार के अलावा कहीं और शराब पीने पर पाबंदी है, लेकिन यहां तो शाम होते ही बाजारों और रास्तों पर लोग खुलेआम शराब पीते दिखाई दे जाएंगे।
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मंदिर, मस्जिद, लाइब्रेरी को किया दरकिनार
लोगों की धार्मिक भावनाएं आहत होतीं हैं तो होतीं हैं, लेकिन शराब कारोबारियों ने विभागीय अधिकारियों से सांठगांठ कर ठंडी सड़क स्थित प्रसिद्ध काली मंदिर और गांधी मार्केट स्थित जामा मस्जिद के पास शराब का ठेका खोल दिया और तो और मेहता पार्क लाइब्रेरी के पास भी शराब का ठेका खोल दिया गया।
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दवा के साथ बिक रही दारु
आगरा रोड पर हड्डी रोग विशेषज्ञ डाक्टर वीरेंद्र पाल के क्लिनिक के पास देशी शराब का ठेका खुला है। जबकि रेलवे रोड पर गोयल नर्सिंग होम के बराबर में भी शराब का ठेका खुला है। यानी पहले दवा लें और बाद में दारु।
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शराब की दुकानों के संचालन में सुप्रीम कोर्ट की गाइड लाइन का पालन किया जा रहा है। धार्मिक स्थल या स्कूल से 50 मीटर दूर दुकान खोलने का प्रावधान है। यदि मंदिर या मस्जिद रजिस्टर्ड है तो वहां शराब का ठेका किसी कीमत पर नहीं खुलेगा।
- वीके शर्मा, आबकारी अधिकारी एटा