20 लाख की आबादी वाले जिले में पर्यावरण सुरक्षा के इंतजाम नाकाफी हैं। बढ़ रहे प्रदूषण को लेकर कोई कड़े कदम नहीं उठाए जा रहे। और तो और कृषि प्रधान जिले में मानक के अनुसार वन्य क्षेत्र भी नहीं है।
जिले को हर वर्ष तीन लाख पौध रोपण का लक्ष्य मिलता है। हल्का मानसून कहें या संबंधित विभागों की उपेक्षा, इसमें से एक फीसदी पौधे भी वृक्ष नहीं बन पाते। यहां हरियाली केवल कागजों पर ही लहलहाती नजर आती है। बताते चलें कि वित्तीय वर्ष 2015-16 की तुलना में इस वर्ष जिले को डेढ़ गुना अधिक पौधरोपण का लक्ष्य दिया गया है। इतना ही नहीं पौध रोपण को सफल बनाने के लिए गड्ढे खुदवाने का काम पहले ही कर लिया गया है। गड्ढों के सत्यापन के लिए आडिट एवं नोडल टीमों का गठन कर सत्यापन भी कराया गया है।
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एक प्रतिशत भी नहीं वन्य क्षेत्र
33 फीसदी के मानक में जिले में एक प्रतिशत का भी वन्य क्षेत्र नहीं है। ऐसे में यहां प्रदूषण नियंत्रण की कल्पना बेमानी है। प्रशासन के दावों के बाद भी जिले में पेड़ कटान पर प्रभावी अंकुश नहीं लग पा रहा। अंदाजा इस बात से भी लगाया जा सकता है कि जिले में दर्जनों आरामशीनें अनाधिकृत रूप से संचालित हैं।
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बीच शहर से गुजरता जीटी रोड
शहर के बीच से गुजर रहा जीटी रोड पर धुंआ उगल रहे वाहन भी शहर के वायुमंडल को प्रदूषित कर रहे हैं। जीटी रोड से गुजरने वाले प्रतिदिन दस हजार से अधिक वाहनों का धुंआ हवा को और जहरीला बना रहा है।
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वर्ष 2016-17 में जिले में पौधरोपण का लक्ष्य 4.50 लाख
अकेले वन विभाग द्वारा प्रस्तावित पौधरोपण लक्ष्य 3.55 लाख
अन्य विभागों द्वारा प्रस्तावित पौधरोपण लक्ष्य 95 हजार
गत वर्ष 2015-16 में रहा पौधरोपण का लक्ष्य 3 लाख