एटा। सांसद हरनाथ सिंह ने राज्यसभा में हिंदी भाषा को लेकर संबोधन दिया। इसमें उन्होंने कहा कि मातृभाषा को पढ़ाई का माध्यम बनाया जाए और अंग्रेजी को वैकल्पिक विषय।
राज्यसभा सांसद ने बताया कि उन्होंने संसद में कहा, पुणे में अत्यंत प्रतिष्ठा प्राप्त विधि शिक्षा संस्थानों में प्रवेश परीक्षा केवल अंग्रेजी भाषा में होती है। जिसके चलते अंग्रेजी न जानने वालों के लिए इन संस्थानों के दरवाजे पूरी तरह बंद हैं। देश में अंग्रेजी माध्यम स्कूलों की बाढ़ आई हुई है। इनमें शिक्षा का माध्यम अंग्रेजी और हिंदी तथा अन्य मातृभाषाएं वैकल्पिक विषय के रूप में पढ़ाई जाती हैं। उन्होंने कहा कि बच्चे अंग्रेजी पढ़ें इसमें कोई आपत्ति नहीं, लेकिन अंग्रेजी माध्यम नहीं होना चाहिए। कान्वेंट स्कूलों की बात करते हुए कहा कि वहां कोई बच्चा हिंदी में बात करता है तो उस पर जुर्माना लगाया जाता है। कहा कि संसदीय सचिवालय, भारत सरकार के सभी मंत्रालयों का अधिकांश कार्य अंग्रेजी में होता है। जो खुलेआम राजभाष अधिनियम का उल्लंघन है। इससे हम आर्थिक, सामाजिक, शैक्षणिक सभी क्षेत्रों में पिछड़ते चले आ रहे हैं। उन्होंने मांग रखी कि मातृभाषाओं को प्रतिष्ठा देने और अंग्रेजी के तेजी से बढ़ते वर्चस्व को कम करने के लिए अविलंब कार्रवाई करनी चाहिए।