एटा। घर का वह इकलौता बेटा और सभी का चहेता था। छोटे से परिवार में अभिषेक के जाने से खुशियां ही छिन गईं। पुत्र की मौत के बाद मां नीरज तो बेसुध है। वहीं छोटी बहन सौम्या के आंसू नहीं थम रहे हैं। वह भी बार-बार बेहोश हो जाती है। मंगलवार को अभिषेक की खुदकुशी के बाद बुधवार को शहर के ही श्मसान घाट पर उसके शव का अंतिम संस्कार किया गया। जवान बेटे की अर्थी को कंधा देने वाले रवेंद्र के लिए यह दुनिया का सबसे बड़ा भार था। दर्द को छिपाने का लाख प्रयास करने के बाद भी उनकी आंखें बार-बार भर आ रही थीं। उधर, अभिषेक की मां नीरज न तो कुछ बोल पा रही थी और न ही किसी की बात सुनने-समझने में समर्थ थीं। बेसुध और निढाल होकर एक कोने में दिन भर बैठी रहीं।
छोटी बहन सौम्या के जहन में भाई की यादें छाई हुई थीं। आंखों से झर-झर बहते आंसू के बीच बार-बार भाई को पुकारकर बचपन की बातें बता रही थी। पिता रवेंद्र कहते हैं कि इकलौते भाई की अचानक मौत होने से सौम्या काफी आहत है। बचपन से साथ में खाते-पीते और खेलते आ रहे दिनों की यादें जहन में ताजा हो जाती हैं। आंसुओं को नहीं रोक पाती और भैया-भैया करके बेहोश हो जाती है। रवेंद्र का कहना है कि जेल से आने के बाद बेटे ने कहा था कि पुलिस ने मेरी जिंदगी बर्बाद कर दी। मेरा भविष्य कैसा होगा, मैं समझ नहीं पा रहा हूं। उसे समझाने की बहुत कोशिश की, लेकिन पुलिस कार्रवाई के अवसाद से वह उबर नहीं पाया।