सकीट क्षेत्र में पाला के असर से गलकर उखड़ी पड़ी आलू की फसल ।संवाद
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एटा। जिले में आलू की फसल करने वाले किसानों की चिंता बढ़ती जा रही है। पाला (तुषार) ने उनकी परेशानी बढ़ा दी है। पहले से ही बारिश होने की वजह से आलू की फसल करीब 10 फीसदी से बर्बाद हो चुकी है । अब पारा की वजह से झुलसा रोग ने हमला कर दिया है।
तीन दिन से लगातार पाला गिरने से आलू उत्पादक किसानों की चिंता बढ़ी हुई है। आलू की फसल में झुलसा रोग लगना शुरू हो गया है। पाला पड़ने के बाद आलू की फसल को और अधिक नुकसान होने की संभावना किसान जता रहे हैं। जिले में करीब आठ हजार हेक्टेयर क्षेत्रफल में आलू की फसल की जाती है। सबसे अधिक पैदावार जलेसर तहसील क्षेत्र में की जाती है।
यहां कुछ दिन पहले बरसात और अवागढ़ ब्लॉक क्षेत्र में ओलावृष्टि की वजह से आलू की फसल पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा। एक-दिन धूप निकलने से मौसम कुछ संभला, लेकिन अब पाला ने मुश्किल पैदा कर दी है। वरिष्ठ प्राविधिक सहायक कृषि रक्षा त्रिबल सिंह ने बताया कि पाला की वजह से आलू की फसल का विकास नहीं हो पाता है। जिससे आलू काला पड़ जाता है और इसका आकार सिकुड़ जाता है।
झुलसा रोग से बचने के लिए करें छिड़काव
जिला कृषि रक्षा अधिकारी मनोज कुमार ने बताया कि अभी पाला गिरने का सिलसिला जारी है। ऐसे में आलू की फसल में झुलसा रोग लगने की संभावना है। इससे बचाने के लिए किसानों को जिनेव 75 प्रतिशत वाटर सॉल्यूबल पाउडर (डब्ल्यूपी) 2 किलोग्राम या कॉपर ऑक्सीक्लॉराइड 50 प्रतिशत डब्ल्यूपी 2.5 किलोग्राम मात्रा प्रति हेक्टेयर की दर से लगभग 500 से 600 लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करें।