एटा। नगर पालिका परिषद पर्यावरण प्रहरी के रूप में गंदे पानी को शुद्ध करेगी। शहर के नालों से निकलने वाले पानी का बायो रेमिडेशन (प्राकृतिक उपचार) कराया जाएगा। इसके लिए पांच साल में करीब 42 लाख रुपये का खर्चा आएगा।
नगर पालिका परिषद की ओर से शहर से निकलने वाले सभी नालों के गंदे पानी का बायो रेमिडेशन किया जाएगा। नालों का पानी जहां गिरता है वहां के पानी में रहने वाले जीवों पर विपरीत प्रभाव पड़ता है। जिससे जीव व खरपतवार के बीच संतुलन बिगड़ जाता है। इससे वहां का ईको सिस्टम खराब हो जाता है। इसको ध्यान में रखते हुए राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण (एनजीटी) ने नगर पालिका को नाले के पानी का उपचार करने के लिए निर्देशित किया है। अगर नगर पालिका पानी का उपचार नहीं करता है तो उस पर पांच लाख रुपये प्रति नाला के हिसाब से जुर्माना लगाया जाएगा।
सिंचाई के काम आएगा शोधित पानी
नगर पालिका के अधिशासी अधिकारी डॉ. दीप वार्ष्णेय ने बताया कि गंदे पानी को एंजाइम के द्वारा शुद्ध किया जाएगा। जिसके बाद इस पानी को खेत में सिंचाई के लिए प्रयोग किया जा सकेगा। उन्होंने बताया कि शहर से करीब 5 एमएलडी (मिलियन लीटर पर डे) गंदा पानी निकलता है जिसका बायो रेमिडेशन किया जाएगा।
42 लाख की लागत से किया जाएगा पानी का उपचार:
शहर के गंदे पानी के उपचार के लिए करीब 42 लाख रुपये की कार्ययोजना बनाई गई है। यह उपचार पांच वर्ष तक किया जाएगा। इसके बाद एनजीटी के अगले निर्देश आने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।
पर्यावरण प्रहरी के रूप में नगर पालिका द्वारा शहर से निकलने वाले करीब 5 एमलडी गंदे पानी का बायो रेमिडेशन निरंतर किया जाएगा। एनजीटी के निर्देशानुसार पांच साल तक यह प्रक्रिया अपनानी है।
- डॉ. दीप वार्ष्णेय, ईओ, नगर पालिका