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मेडिकल कॉलेज से हर रोज पांच मरीज रेफर

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एटा। जिला अस्पताल मेडिकल कॉलेज में उच्चीकृत हो चुका है। अन्य अस्पतालों से भेजे वाले मरीजों को भी यहां उच्च उपचार की सेवाएं मिलनी चाहिए। लेकिन हाल पुराना ही बना हुआ है। प्राथमिक उपचार देकर मरीजों को आगरा या अलीगढ़ मेडिकल कॉलेज भेजा जा रहा है। औसतन पांच मरीज हर रोज रेफर कर दिए जाते हैं। नवंबर में करीब 150 मरीजों को यहां से रेफर किया गया। एक मेडिकल कॉलेज से दूसरे मेडिकल कॉलेज रेफर किए जाने की व्यवस्था पर लोग सवाल उठा रहे हैं। संवाद
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केस 1:
रिजोर थाना क्षेत्र के गांव कुरीना दौलतपुर में दो पक्षों के बीच 21 नवंबर को जमकर संघर्ष हुआ। इसमें रविकांत के सिर में चोटें आईं। परिजन इस आस से मेडिकल कॉलेज पहुंचे कि यहां इलाज की सभी सुविधाएं मिल जाएंगी। लेकिन डॉक्टरों ने हेडइंजरी का केस बताते हुए आगरा के लिए रेफर कर दिया।
केस 2: मैनपुरी जिले के कुरावली थानांतर्गत गांव सलेमपुर से कुछ लोग मुन्नीदेवी को 25 दिसंबर को मेडिकल कॉलेज लेकर पहुंचे। उनका कहना था कि एटा में मेडिकल कॉलेज बन गया है, इसलिए यहीं ले आए हैं। मुन्नी देवी को सीने में दर्द की समस्या थी। हृदय रोग विशेषज्ञ की कमी बताते हुए उन्हें आगरा रेफर कर दिया गया।
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गोलीकांड देखते ही तुरंत करते हैं रेफर
अपराध के मामलों में एटा बदनाम रहा है। अक्सर लड़ाई-झगड़े में गोलियां चल जाती हैं। पहले जिला अस्पताल से इस तरह के मामलों में इलाज की सुविधा से मना कर दिया जाता था। अब मेडिकल कॉलेज बनने के बाद भी चिकित्सकों और कर्मचारियों का रवैया नहीं बदला है। गोलीकांड देखते ही मरीज को तुरंत रेफर कर दिया जाता है। भले ही गोली हाथ-पैर आदि हिस्से में लगी है। जिसे सर्जन ऑपरेशन कर इलाज दे सकते हैं।
मेडिकल कॉलेज बनने के बाद ओपीडी और इनडोर सेवाओं में सुधार हुआ है। इमरजेंसी में कुछ दिक्कतें बनी हुई हैं। अधिकांश मामले रोड एक्सीडेंट के आते हैं। यहां सीटी स्कैन की सुविधा न होने के कारण मरीजों को रेफर करना मजबूरी हो जाती है। कुछ विशेषज्ञ चिकित्सकों का भी अभाव है।
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- डॉ. रजनी पटेल, कार्यवाहक प्राचार्य मेडिकल कॉलेज
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