एटा। अभी तक एंबुलेंस की फिटनेस एआरटीओ कार्यालय द्वारा ही की जाती थी। जहां आरआई फिटनेस प्रमाण पत्र दे देते थे, लेकिन अब एंबुलेंस में चिकित्सीय संसाधनों की स्थिति की पड़ताल चिकित्सक द्वारा की जाएगी। उसके प्रमाणपत्र पर ही एंबुलेंस को फिटनेस दी जाएगी। अलग से एक चिकित्सक की तैनाती एआरटीओ कार्यालय पर की जाएगी।
एआरटीओ कार्यालय में 50 एंबुलेंस पंजीकृत हैं। जहां फिटनेस के दौरान आरआई द्वारा वाहन के मानकों की पड़ताल कर उन्हें फिटनेस प्रमाणपत्र दिया जाता है। आरआई द्वारा जरूरी दवाओं सहित ऑक्सीजन की पड़ताल गहनता से नहीं हो पाती थी। वहीं एंबुलेंस पर ईएमओ है या नहीं इसकी जांच नहीं की जाती थी। इसको लेकर उच्चाधिकारियों ने एंबुलेंस की फिटनेस के लिए एक चिकित्सक को पड़ताल के लिए रखने के निर्देश दिए हैं।
उच्चाधिकारियों ने एआरटीओ को भेजे पत्र में कहा है एंबुलेंस में मरीज जाते हैं। हालत बिगड़ने पर एंबुलेंस में ही उनका उपचार हो सके, इसके लिए संसाधनों को देखना जरूरी है। इसी को लेकर उन्होंने एंबुलेंस की फिटनेस के समय चिकित्सक द्वारा स्वीकृत पत्र होने की बात कही है। जहां फिटनेस प्रमाण पत्र पर आरआई के अलावा चिकित्सक के हस्ताक्षर होंगे। इसके बाद ही उसको वैध माना जाएगा। एआरटीओ हेमचंद्र गौतम ने बताया कि उच्चाधिकारियों के निर्देश पर एंबुलेंस की फिटनेस के समय चिकित्सक का होना अनिवार्य किया गया है। इसको लेकर सीएमओ को पत्र भेजा है। जिससे फिटनेस के समय कार्यालय पर चिकित्सक उपलब्ध रहें।