एटा। जिले में संचालित गोशालाओं में जल्द ही कुछ खास व्यवस्थाएं नजर आएंगी। वहां गोबर की बंदनवार, मूर्तियां दीपक आदि बनाए जाएंगे। इससे जहां गोशालाएं आत्मनिर्भर बनेंगी, वहीं लोगों को यहां से रोजगार भी हासिल होगा। गोबर से बने विभिन्न उत्पाद बाजार में बेचे जाएंगे।
जिले में 20 गोशालाओं का संचालन हो रहा है। इनमें से 4 गोशालाएं प्रमुख कस्बों में है। जहां हजारों की संख्या में गोवंश संरक्षित किए गए हैं। इन गोशालाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए पशुपालन विभाग की ओर से नया कदम बढ़ाया गया है। मुख्य पशु चिकित्साधिकारी (सीवीओ) ने बताया कि कार्ययोजना शासन को भेजी जाएगी। स्वीकृति मिलते ही गोशालाओं में कार्यरत कर्मचारियों को इस योजना से संबंधित जानकारी प्रदान की जाएगी। इसके बाद चरणवद्ध तरीके से काम कराया जाएगा।
उत्पाद बनाने के लिए दिया जाएगा प्रशिक्षण
सीवीओ अनिल कुमार ने बताया कि गोशाला में काम करने वाले कर्मचारियों को प्रथम चरण में उत्पाद बनाने से संबंधित प्रशिक्षण दिया जाएगा। इससे कि यह लोग प्रशिक्षण के बाद तेजी से काम कर सकें। बताया कि गोबर से कई प्रकार के उत्पाद बनाने का प्रशिक्षण दिया जाएगा।
मिलेगा रोजगार समृद्ध होगी गोशाला
सीवीओ ने बताया कि गाय के गोबर से बने उत्पादों को तमाम लोग पसंद करते हैं। ऐसे में इन्हें बनाने में काफी संख्या में लोगों को रोजगार मिलेगा। गोशाला में काम करने वाले लोगों के अलावा बाहर के लोग जो लगन से काम करने के इच्छुक होंगे, उनको प्रशिक्षण देने के बाद रोजगार दिया जाएगा।