निधौली कलां ब्लॉक क्षेत्र के गांव धौलेश्वर में बंद पड़ा नवनिर्मित हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर। संवाद
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एटा। ग्रामीण क्षेत्र में लोगों तक बेहतर चिकित्सा सेवाएं आसानी से पहुंचाने के दावा हवा में ही चल रहे हैं। वर्ष 2018 से अब तक 138 हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर का निर्माण कराने की मंजूरी दी गई लेकिन 81 ही बने। 57 का कार्य अधर में लटका हुआ है, जिसके चलते ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित हैं।
उप स्वास्थ्य केंद्रों को हेल्थ एंड वेलनेस सेंटरों के रूप में उच्चीकृत करने और नए निर्माण कराने के लिए हर साल शासन की ओर से मंजूरी दी जा रही है। जिससे कि ग्रामीण क्षेत्रों की स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार आए लेकिन कार्यदायी संस्थाओं की लेटलतीफी की वजह से केंद्र निर्माण कार्य समय से पूरा नहीं हो पा रहा है। वर्ष 2018-19 में 20 सेंटरों को स्वीकृति मिली थी। इसमें से अभी भी एक केंद्र अधूरा पड़ा है। जबकि 2019-20 में 44 सेंटरों का निर्माण स्वीकृत हुआ, इनमें से छह अभी तक नहीं बन सके हैं। 2020-21 में 33 को स्वीकृति मिली, नौ अभी भी शेष हैं। वर्ष 2021-22 में 41 हेल्थ एंड वेलनेस सेंटरों का निर्माण कार्य कराने की स्वीकृति शासन से मिली। इनमें से फिलहाल कोई पूरा नहीं बन सका है। कुल मिलाकर वर्तमान में 57 सेंटर अधूरे पड़े हैं।
97 सीएचओ की हो चुकी है तैनाती
हेल्थ एंड वेलनेस सेंटरों का संचालन कम्युनिटी हेल्थ ऑफिसर (सीएचओ) द्वारा किया जाना है। जिनकी नियुक्ति कर शासन से उन्हें भेजा जा रहा है। 138 केंद्रों के सापेक्ष शासन ने जिले को 97 सीएचओ दे दिए हैं, लेकिन यहां 81 ही बन सके हैं। अन्य सीएचओ को स्वास्थ्य उपकेंद्रों पर बैठाया जा रहा है।