अलीगंज। जी हां, पढ़कर आप चौंक जरूर रहे होंगे, लेकिन यह सरकारी सिस्टम है। जहां कुछ भी संभव है। मरने के नौ साल बाद एक व्यक्ति पर ग्राम समाज की जमीन कब्जाने की रिपोर्ट दर्ज करा दी गई। मजेदार बात तो यह है कि प्रधान की शिकायत पर एसडीएम ने तहसीलदार से जांच कराई। इस जांच में भी मृतक का नाम शिकायत से नहीं हटाया गया और उस सहित कुल छह लोगों पर रिपोर्ट दर्ज करा दी गई।
मामला ग्राम पंचायत कंचनपुर आसे का है। इस पंचायत के गांव किनौड़ी खैराबाद निवासी सुरजीत सिंह की मृत्यु 4 दिसंबर 2013 को एक सड़क हादसे में हो गई थी। 25 दिसंबर 2013 को ऑनलाइन प्रमाणपत्र जारी किया गया। इतना लंबा समय बीतने के बाद मौजूद ग्राम प्रधान ऋषि यादव ने 4 मई 2022 को एक प्रार्थनापत्र एसडीएम को दिया। बताया कि गांव के सुरेश सिंह सहित छह लोगों ने ग्राम समाज की तीन बीघा जमीन पर कब्जा कर रखा है। इनमें सुरजीत का नाम भी शामिल था। एसडीएम ने तहसीलदार को जांच कर आख्या प्रस्तुत करने का आदेश दिया।
अगले दिन तहसीलदार राकेश कुमार ने राजस्व निरीक्षक व लेखपाल को जांच के लिए आदेशित कर दिया। जांच हो गई और किसी को यह भी नहीं पता लगा कि एक आरोपी की मृत्यु हो चुकी है। 10 जून को अलीगंज थाने में भारतीय दंड संहिता और सार्वजनिक संपत्ति निवारण अधिनियम के तहत सभी छह लोगों के विरुद्ध रिपोर्ट दर्ज कर ली गई। जानकारी होने पर सुरजीत का पुत्र पवन कुमार अधिकारियों को सफाई देता घूम रहा है। उसने बताया कि पिताजी की मृत्यु के बाद भी गलत रूप से उनके ऊपर अवैध कब्जे की रिपोर्ट ग्राम प्रधान ने दर्ज करा दी है। जिसे खत्म करने के लिए एसएसपी और एसडीएम को प्रार्थनापत्र दिए हैं।
...तो क्या घर बैठकर ही चलती रहीं जांचें?
घर बैठकर जांचें करने के लिए राजस्व विभाग पहले से ही बदनाम है। इस मामले में भी ऐसा ही कुछ होता नजर आ रहा है। भले ही एसडीएम, तहसीलदार दफ्तरों में बैठे रहे हों लेकिन लेखपाल और राजस्व निरीक्षक को तो गांव के चप्पे-चप्पे की जानकारी होती है। ऐसे में इतनी बड़ी चूक कैसे हुई, यह सवाल उठ रहा है। उधर, पुलिस ने भी बिना प्राथमिक जांच-पड़ताल के रिपोर्ट दर्ज कर ली।