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डॉ. सचान हत्याकांड की दोबारा जांच के आदेश

Fri, 22 Feb 2013 11:23 PM IST
लखनऊ/ब्यूरो
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सीबीआई के विशेष न्यायाधीश नीलकांत मणि त्रिपाठी ने पूर्व डिप्टी सीएमओ डॉ. वाईएस सचान की 22 जून 2011 को जेल में संदिग्ध हालात में हुई मौत को खुदकुशी करार देने वाली सीबीआई की क्लोजर रिपोर्ट खारिज कर दी है। विशेष न्यायाधीश ने जांच पर सवाल उठाते हुए कहा है कि सीबीआई ने तर्कसंगत विवेचना नहीं की।
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अदालत ने एम्स के मनोचिकित्सकों की उस थ्योरी को भी नकार दिया जिसमें कहा गया था कि डॉ. सचान ने अवसाद के कारण खुदकुशी कर ली। अदालत ने डॉ. सचान की पत्नी मालती सचान की आपत्ति को स्वीकार करते हुए सीबीआई के डीआईजी को निर्देश दिया कि हाईकोर्ट ने आदेश में जिन तथ्यों, हालातों का जिक्र किया है, उसी के अनुसार मामले की दोबारा जांच कराएं।

कोर्ट ने 14 पन्नों के विस्तृत आदेश में कहा कि जब जेलर तथा अन्य लोगों को यह पता चला कि डॉ. सचान शौचालय के कमोड पर संदिग्ध अवस्था में बैठे हैं तो उन्हें तुरंत पुलिस को सूचना देनी चाहिए थी। साथ ही जेल के डॉक्टर से उनकी जांच करानी चाहिए थी।
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कोर्ट ने कहा कि फोरेंसिक एजेंसी को सूचना दी गई कि जेल में किसी बंदी ने आत्महत्या कर ली है। पूछताछ में फोरेंसिक एजेंसी के सहायक निदेशक सुरेश ने भी यह बयान दिया था कि उन्हें जेल में किसी बंदी के आत्महत्या करने की सूचना मिली थी।

कोर्ट ने कहा कि जब डॉक्टर सचान की ठुड्डी सिस्टन पर टिकी थी और उनके शरीर पर कई जगह घाव थे, टॉयलेट खून से सना था, ऐसे में जेल अधिकारियों को कैसे पता चला कि उन्होंने आत्महत्या कर ली है।

22 जून 2011 को लखनऊ जेल में डॉ. सचान की मौत होने की खबर आई थी। बाद में हाईकोर्ट के निर्देश पर इसकी सीबीआई जांच के निर्देश दिए गए थे। सीबीआई ने लंबी जांच के बाद सितंबर 2012 में सीबीआई कोर्ट में अपनी क्लोजर रिपोर्ट पेश कर दी थी।

अन्य साक्ष्यों के बिना पॉलिग्राफ टेस्ट निर्णायक नहीं
कोर्ट ने सीबीआई की ओर से पेश डिप्टी जेलर सुनील सिंह समेत अन्य के पॉलिग्राफ टेस्ट को आधार मानने से भी इनकार कर दिया है। अदालत का कहना है कि पॉलिग्राफ टेस्ट मात्र विशेषज्ञ की राय है। बिना अन्य साक्ष्यों के पॉलिग्राफ टेस्ट को निर्णायक नहीं माना जा सकता है।

वहीं, कोर्ट ने गवाह सिराजुद्दीन के उस बयान को महत्वपूर्ण माना जिसमें उसने कहा था कि डॉ. सचान का व्यवहार 18 जून 2011 तक सामान्य था। वह खुद दही जमाते थे तथा रात के खाने में सलाद लेते थे कोर्ट ने कहा कि स्पष्ट है कि डॉ. सचान अपने स्वास्थ्य के प्रति 18 जून तक संवेदनशील थे।
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