संवाद न्यूज एजेंसी
देवरिया। मेडिकल कॉलेज में एलर्जी की जांच की सुविधा नहीं है। मौसम बदलने या बार-बार खांसी, सांस लेने में दिक्कत के बाद परेशानी अधिक बढ़ने पर एसपीटी (स्कीन प्रीग टेस्ट) जांच की जरूरत महसूस होती है, ताकि एलर्जिक अस्थमा की पहचान हो सके।
यहां ओपीडी में एलर्जी और अस्थमा की समस्या लेकर रोजाना मरीज आते हैं। ऐसे में मरीजों को अधिक कीमत चुकता कर बाहर जांच करानी पड़ती है।
एलर्जी की समस्या मौसम बदलने पर बढ़ जाती है। जबकि कुछ लोगों को कुत्ता, बिल्ली सहित अन्य पशुओं के अलावा डस्ट, हाऊस डस्ट माइल्ड, ग्रास, धुआं आदि से एलर्जी होती है।
एलर्जी 80 से 82 तरह की होती है। इसमें करीब 20 से 25 महत्वपूर्ण होती है। शुरुआत में बार-बार छीक, नाक, आंख से पानी आने और सांस की दिक्कत होती है। आगे चलकर अस्थमा की समस्या हो जाती है।
मेडिकल कॉलेज के चेस्ट और सांस विभाग की ओपीडी में इस तरह के 50 प्रतिशत मरीज आते हैं, मगर जांच की सुविधा न होने पर डॉक्टर लक्षण के आधार पर डायग्नोसिस कर इलाज करते हैं।
जरूरत पड़ने पर आईजीई जांच बाहर से करानी पड़ती है, जहां इसके लिए नौ सौ रुपये चुकाने पड़ते हैं। इसमें रिपोर्ट बढ़ा होने पर एसपीटी जांच कराते हैं। पर यहां सुविधा न होने से मरीजों को भटकना पड़ता है। एसपीटी जांच किट से कंफर्म मानी जाती है। हाथ पर निशान लगाकर लैंस सेट निडिल से जांच की जाती है।
इसके लिए मरीज को चार हजार रुपये खर्च करना पड़ता है। इस जांच से एलर्जिक अस्थमा की पहचान होती है कि किस चीज से एलर्जी है। इसके बाद डॉक्टर को डायग्नोसिस और इलाज करने में आसानी होती है। यहां जांच की व्यवस्था न होने से मरीजों और तीमारदारों का समय बर्बाद होता है और आर्थिक बोझ पड़ता है।