डीएम ने सात दिन बाद मांगी थी रिपोर्ट, 15 दिन बाद भी जांच पूरी नहीं
अमर उजाला ब्यूरो
देवरिया। प्रदेश के मुख्यमंत्री जहां भू माफिया को लेकर सख्त हैं। स्थानीय राजस्व महकमा ठीक इसके वितरित है। 24 अगस्त को जिस भूमि की जांच कर डीएम ने एक सप्ताह में रिपोर्ट मांगी थी, 15 दिन बाद भी वह जांच पूरी नहीं हुई। सूत्रों की माने तो अब जाकर जांच शुरू हुई है।
‘अमर उजाला’ ने 19 अगस्त के अंक में ‘करोड़ों की जमीन पर भू माफिया का कब्जा’ शीर्षक से खबर प्रकाशित की थी। इसे गंभीरता से लेते हुए डीएम आशुतोष निरंजन ने 24 अगस्त को मामले की जांच एसडीएम सदर को सौंप दी। उन्होंने एक सप्ताह में रिपोर्ट मांगी। यह जांच अब तक पूरी नहीं हुई।
सूत्रों के अनुसार, इसके पीछे तहसील के अधिकारियों एवं कर्मचारियों की मिलीभगत भी एक कारण है। इसी वजह से सात दिनों तक पत्रावली स्थानीय लेखपाल को जांच के लिए नहीं दी गई।
जांच मिलते ही उसी दिन एसडीएम सौरभ सिंह ने मामले में तहसीलदार सदर और जेई आरबीओ से आख्या तलब किया। तहसीलदार ने नायब तहसीलदार को अग्रसारित कर चुप बैठ गए। एक सितंबर को लेखपाल से रिपोर्ट तलब की गई है। एक सप्ताह तक फाइल चक्कर काटती हुई लेखपाल के पास पहुंचने के बाद ऐसा लगता है कि कोई हल जल्द नहीं निकलने वाला है। वैसे इस मामले में बंश बहादुर, मलखा, हरिशंकर यादव, गिरिजाशंकर यादव, सुरेंद्र कुशवाहा, सुभाष कुशवाहा, योगेंद्र कुशवाहा, मदन लाल कुशवाहा,सुनील कुमार, शंभू शरण कुशवाहा, वीरेंद्र तिवारी, गिरिजाशंकर तिवारी फरजाना खातून रेयाज अहमद , मधुबाला आदि की मांग है कि जमीन की पैमाइश कराई जाए। अधिकारियों को पीड़ित लोगों ने प्रार्थना पत्र भी सौंपा हैं।
यह है मामला
शहर की भुजौली कॉलोनी में नगरपालिका की तकरीबन 52 एकड़ भूमि है। इसमें तकरीबन 27 एकड़ भूमि पर आचार्य रामचंद्र शुक्ल नगर कॉलोनी वर्ष 1980 के समय विकसित हुई। इसके बाद बुद्ध विहार तकरीबन तीन एकड़ और वर्ष 1999 में पांच से सात एकड़ में महाराणा प्रताप नगर विकसित किया गया। दो एकड़ स्टेडियम एवं पांच एकड़ स्लेज फार्म के लिए नगरपालिका ने भूमि आवंटित की है। आरोप है कि भू माफिया को लाभ पहुंचाने के लिए कालोनी से बीआरडीपीजी जाने वाले सड़क का निर्माण कराया गया। जिससे उनके प्लाट महंगे दामों पर बिक सकें। उधर, इस सड़क के पश्चिमी हिस्से में भू माफिया ने नगरपालिका की करोड़ों की सरकारी जमीन पर कब्जा कर बेच दिया गया है। नगरपालिका कर्मचारियों एवं अधिकारियों की मिलीभगत होने के नाते कभी पैमाइश ही नहीं हुई। आरोप है कि नगरपालिका अपनी प्रॉपर्टी को लेकर खुद लापरवाह है। यहीं वजह है कि नगरपालिका की करोड़ों की भूमि पर लोगों ने कब्जा कर लिया है। नगरपालिका अध्यक्ष अलका सिंह का कहना है कि पैमाइश होने के बाद ही कुछ स्पष्ट हो सकेगा। मेरे कार्यकाल में वैसे किसी जमीन पर कोई कब्जा नहीं हुआ है।
डीएम के निर्देश पर मामले की जांच की जा रही है। राजस्व कर्मियों से विवरण मांगा गया है। रिपोर्ट आने के बाद टीम गठित कराकर पैमाइश कराई जाएगी।
सौरभ सिंह, एसडीएम/ नियत प्राधिकारी, विनियमित क्षेत्र देवरिया