जल निकासी के ठोस इंतजाम नहीं, जलभराव से लोग परेशान
सितंबर में सीएम द्वारा जलभराव से शहर को निजात दिलाने का भरोसा दिलाने के बाद भी नहीं सुधरी स्थिति
अमर उजाला ब्यूरो
देवरिया। आधा शहर जलभराव से जूझ रहा है। कलेक्ट्रेट, न्यायालय परिसर, पुलिस अधीक्षक कार्यालय, लोक निर्माण विभाग का डाकबंगला समेत 20 से अधिक अधिकारियों के आवास और 15 से अधिक मोहल्ले बारिश पर पानी में डूब जाते हैं। बावजूद इसके करीब 20 वर्ष में इस समस्या से निजात दिलाने के लिए कोई ठोस इंतजाम नहीं हुए। शुक्रवार को भी बारिश होते ही जलजमाव कई स्थानों पर हो गया। वहीं जल निगम ने प्रस्ताव बनाकर शासन को भेजा है, इसकी वित्तीय मंजूरी भी मिल गई है। धन के अभाव में नाले का निर्माण कार्य शुरू नहीं हो सका है।
पिछले सितंबर में देवरिया सदर विधानसभा के उपचुनाव से ठीक पहले प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ देवरिया चीनी मिल के मैदान में आए थे। यहां भाजपा के जिला उपाध्यक्ष अजय शाही ने मंच से जलभराव की समस्या उठाई तो सीएम नाराज हुए हालांकि उन्होंने अपने संबोधन में इस समस्या से निजात दिलाने का भरोसा शहरवासियों को दिलाया। शहरवासियों ने भाजपा को उपचुनाव में पूर्ण बहुमत से जीता दिया। लेकिन जलजमाव की समस्या से निजात तकरीबन एक वर्ष बाद भी नहीं मिल सकी है।
शहर की आबादी तकरीबन तीन लाख से अधिक हैं। 25 से अधिक वार्ड और 40 के करीब छोटे- बड़े मोहल्ले हैं। बारिश होते ही राघवनगर, पुलिस लाइन, सोमनाथ नगर, पिड़रा घाट, रामगुलाम टोला, उमानगर चटनी गढ़ही, गायत्रीपुरम, सोमनाथनगर, अलीनगर, आफिसर्स कॉलोनी, हनुमान मंदिर रोड की गलियों एवं मोहल्लों में पानी घुस जाता हैं। इसके अलावा, बेसिक शिक्षा अधिकारी, उप निदेशक कृषि, एसपी आफिस, अस्पताल परिसर, लोक निर्माण विभाग डाक बंगला रोड, कचहरी, वन विभाग कार्यालय सहित कई विभाग के आफिस पानी में डूब जाते हैं। ऐसा गत 20 वर्षों से हैं। कई बार तो तीन फुट से अधिक पानी सड़कों पर जमा हो जाता हैं। दो वर्ष से गोरखपुर - सलेमपुर मार्ग के चौड़ीकरण एवं ऊंचा होने के बाद समस्या और बढ़ गई है। जलनिगम के अधिकारियों ने दो प्रपोजल नगर विधायक डा. सत्यप्रकाश मणि की मांग पर भेजा। जिसमें 117 करोड़ रुपये खर्च कर दो नालों का निर्माण कराया जाना था। वित्तीय मंजूरी विधायक के प्रयास से जरूर मिल गई। लेकिन धन नहीं मिलने की वजह से निर्माण कार्य शुरू नहीं हो सका हैं।
शहर के कई मोहल्ले एवं आफिस बारिश होने पर जलभराव की वजह से पानी में डूब जाते हैं। नगरपालिका ने अपने बजट से ओवरब्रिज के नीचे एक नाला 80 लाख की लागत से बना है। बड़े नालों का निर्माण जलनिगम को करना है। धन के अभाव में निर्माण कार्य शुरू नहीं हो पा रहा है। रामगुलाम टोला में जलजमाव नहर टूटने की वजह से हुआ है।
अलका सिंह, अध्यक्ष नगरपालिका परिषद
कोट:
शहर के कई मोहल्लों में जलभराव से स्थिति खराब है। दो नालों का निर्माण मेरे प्रयास से होना है। वित्तीय मंजूरी मिल चुकी है। विधानसभा चुनाव से पूर्व नालों का निर्माण कार्य शुरू हो जाएगा। धन के लिए मुख्यमंत्री से मुलाकात जल्द ही करूंगा।
- डॉ. सत्यप्रकाश मणि त्रिपाठी
नगर विधायक
कोट:
बारिश की वजह से कई मोहल्लों में जलभराव गंभीर समस्या है। इससे निजात दिलाने का प्रयास नगरपालिका कर रही है। दो प्रस्ताव नगरपालिका के सहयोग से जलनिगम ने तैयार कर शासन को भेजा है। जिसमें नालों का निर्माण होना है। नालों के बन जाने के बाद जलजमाव की समस्या से निजात मिल जाएगी।
रोहित सिंह, अधिशासी अधिकारी
नगरपालिका