देवरिया। प्रतापपुर चीनी मिली की भुगतान में लेटलतीफी के चलते गन्ना किसानों का कुशीनगर के ढाढ़ा चीनी मिली के प्रति झुकाव बढ़ा है। ढाढ़ा मिल द्वारा किसानों का गन्ना समय से लेकर उसका एक पखवारे में भुगतान कर दिया जा रहा है। देवरिया में गौरीबाजार, बैतालपुर, देवरिया सदर, भटनी और प्रतापपुर पांच चीनी मिल चला करती थीं, लेकिन चार चीनी मिलें बंद हो गईं। जिले में वर्तमान समय में किसानों का गन्ना बजाज ग्रुप की प्रतापपुर चीनी मिल पर एवं बिरला ग्रुप की ढाड़ा (हाटा) चीनी पर जाता हैं। प्रतापपुर चीनी मिल द्वारा गन्ना किसानों का भुगतान बहुत ही विलंब से किए जाने के वजह से जो किसान गन्ना बो रहे थे, वह भी धीरे-धीरे गन्ने की खेती छोड़कर धान गेहूं अन्य खेती की तरफ मुड़े हैं। इतना ही नहीं गन्ना भुगतान में काफी समय लगने के वजह से किसानों की मांगों को देखते हुए विगत तीन साल पूर्व प्रतापपुर चीनी मिल का 11 गन्ना क्रय केंद्र ढाढ़ा चीनी मिल को आवंटन हो गया जिसके वजह से प्रतापपुर चीनी मिल पर और गन्ना का संकट खड़ा हो गया। किसानों का कहना है कि आज भी अगर प्रतापपुर चीनी मिल का भुगतान सही हो जाए तो प्रतापपुर चीनी मिल को गन्ना देने में कोई समस्या नहीं है। इधर जिन किसानों का गन्ना ढाढ़ा चीनी मिल एलॉट हो गया है उन क्षेत्रों में भुगतान 15 दिन पर होने से गन्ना का रकबा भी बढ़ गया है। ढाढ़ा चीनी मिल के किसानों का कहना है की चीनी मिल द्वारा कई प्रकार की सुविधा दी जाती हैं गन्ना बुवाई से लेकर गन्ना कटाई तक चीनी मिल के कर्मचारी निरंतर किसानों के संपर्क में रहते हैं। किसानों का मोह हुआ भंग
जिले के गन्ना किसानों का प्रतापपुर चीनी मिल से मोह भंग होने के कई कारण है। इसमें प्रमुख रुप से गन्ना मूल का समय से भुगतान न होना तथा गन्ना समितियां का मृतप्राय हो जाना मुख्य कारण है। इसके चलते गन्ना किसानों ने गन्ना बोने में रुचि लेना छोड़ दिया। प्रतापपुर फैक्ट्री की मानें तो इस समय वर्ष 2023-24 का भुगतान हो चुका है। 1 दिसंबर 2024 से भुगतान बाकी है। गन्ना किसान जयप्रकाश यादव, वीरेंद्र यादव, रामानंद चौधरी, राज नारायण यादव आदि ने बताया कि गन्ना भुगतान के साथ-साथ नील गायों का प्रकोप और गन्ना समितियों का गायब हो जाना, सब्सिडी और गन्ना फसल पर खाद बीज दवा कृषि यंत्र आदि का लोन न मिलना भी कारण है। लोन मिलना बंद हो गया है। यह सब फैक्ट्री अपने हाथ में ले रखी है। एचआर हेड राजेश मठपाल ने बताया कि गन्ना मूल्य भुगतान वर्ष 2023-24 का हो गया है। बाकी के भुगतान की व्यवस्था की जा रही है। गन्ना समितियों का लोन किसानों द्वारा समय से भुगतान नहीं करने के कारण मृत प्राय हो गई है।