‘विशेन वंश दर्पण’ पुस्तक का हुआ विमोचन
देवरिया। शहर के महारानी चंडिका छात्रावास सभागार में आयोजित समारोह में महारानी चंडिका प्रसाद कुंवरी की जयंती मनाई गई। वक्ताओं ने मझौलीराज की अंतिम रानी के व्यक्तित्व व कृतित्व पर प्रकाश डाला। वहीं डॉ. वंश गोपाल शाही द्वारा लिखित पुस्तक विशेन वंश दर्पण का विमोचन मुख्य अतिथि बलिया के विधायक सुरेंद्र सिंह ने किया।
उन्होंने कहा कि पुस्तक में मझौली राजवंश की प्राचीनता, उच्च न्यायालय इलाहाबाद द्वारा उल्लिखित सौ से अधिक पीढ़ी के राजाओं का उल्लेेख है। कहा कि यहां से निकलकर विशेन वंश के क्षत्रिय पूर्वी उत्तर प्रदेश, बिहार, हिमाचल प्रदेश तथा देश के अन्य हिस्सों में फैले हैं। पूर्वांचल में गोंडा, कालाकाकर, कुंडा, भदरी, मनकापुर देवतहां, भिनगा आदि राज्य मझौलीराज से ही बने। उन्होंने कहा कि प्राचीनतम मल्ल राज्य यही था। नेपाल के राजा (विशेन) साढ़े तीन वर्षों तक रहे। महात्मा बुद्ध का भी संबंध इस राज्य से रहा।
उत्तर भारत में इतना प्राचीन राजवंश, अन्य नहीं है। उन्होंने कहा कि मझौलीराज की एक शाखा देवरिया जनपद के ग्राम गड़ेर व बैरौना में है, जो अपने सांस्कृतिक, साहित्यिक संस्कारों के कारण ख्याति प्राप्त है। पुस्तक में इस वंशावली का विवरण है। कहा कि पुस्तक के लेखक एमएलकेपीजी कॉलेज बलरामपुर के पूर्व प्राचार्य डॉ. वंश गोपाल शाही का पैतृक गांव गड़ेर है। वह राष्ट्रीय स्तर के वैज्ञानिक, आकाशवाणी व्याख्याता व विद्वान हैं। उन्होंने कोरोना काल में पुस्तक लिखी। इस दौरान भाजपा जिलाध्यक्ष अंतर्यामी सिंह, नगर पालिका अध्यक्ष अलका सिंह, माया सिंह, हियुवा के जिला संयोजक नीरज शाही, भूपेंद्र सिंह आदि मौजूद रहे।