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Ram Mandir: बाबा राघवदास ने 1948 में ही कर दी थी भव्य राम मंदिर बनने की भविष्यवाणी

Fri, 12 Jan 2024 03:02 PM IST
vivek shukla सच्चिदानंद पांडये, गोरखपुर।

सार

अयोध्या में भव्य राम मंदिर के सपने में परिस्थितियों के चलते व्यवधान के बाद बाबा राघवदास के निर्देश पर 1952 में अनंत आश्रम में सत्यव्रत महाराज ने अभयद् राघव मंदिर का निर्माण कराया था। इसमें मझौली की रानी की ओर से भेजी गई कीमती सीताराम, हनुमान और राधाकृष्ण की मूर्तियों की प्राण-प्रतिष्ठा कराई गई थी।
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Ram Mandir - फोटो : Agency (File Photo)
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विस्तार
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अनंत आश्रम के पीठाधीश्वर रहे बाबा राघवदास ने 1948 में ही अयोध्या में भव्य राम मंदिर बनने की भविष्यवाणी कर दी थी। उन्होंने कहा था कि देश की स्थिति मजबूत होने पर अयोध्या में भव्य राम मंदिर बनेगा।

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छोटी छावनी के महंथ रहे रामचंद्र दास के नेतृत्व में संत समाज के लोगों ने बाबा को पहली बार फैजाबाद से विधायक बनाया था। अयोध्या में प्रभु श्रीराम की प्राण-प्रतिष्ठा के उपलक्ष्य में अनंतपीठ के अभयद् राघव मंदिर में भी उत्सव की तैयारी की जा रही है।

राम मंदिर आंदोलन में बाबा राघवदास की अहम भूमिका रही। अनंतपीठ के पीठाधीश्वर आंजनेय दास बताते हैं-राम मंदिर के उद्धार के लिए साधु-संतों ने 1948 में अयोध्या के छोटी छावनी के महंथ रामचंद्र दास के नेतृत्व में बाबा राघवदास को विधायक बनाया था। गर्भगृह में प्रभु श्रीराम के प्राकट्य प्रकरण में बाबा का योगदान माना जाता है। तब इसका जबरदस्त विरोध हुआ। तत्कालीन डीएम की ओर से हालात पर काबू पाने और यथास्थिति बनाए रखने के निर्देश दिया गया था।
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अयोध्या में भव्य राम मंदिर के सपने में परिस्थितियों के चलते व्यवधान के बाद बाबा राघवदास के निर्देश पर 1952 में अनंत आश्रम में सत्यव्रत महाराज ने अभयद् राघव मंदिर का निर्माण कराया था। इसमें मझौली की रानी की ओर से भेजी गई कीमती सीताराम, हनुमान और राधाकृष्ण की मूर्तियों की प्राण-प्रतिष्ठा कराई गई थी। बाबा अक्सर कहते थे कि समय अनुकूल होने और परिस्थिति सही होने पर भव्य राम मंदिर बनेगा।
 

पतंग-चरखी बेच दिया पुलिस को झांसा और पहुंच गए अयोध्या
अयोध्या में कारसेवा में जाने से लोगों को रोकने के लिए पुलिस सख्ती बरत रही थी। ऐसे में हम लोगों ने पुलिस को झांसा देने के लिए पतंग-चरखी बेचने का झांसा दिया। ऐसा करते-करते हम अयोध्या पहुंच गए।

राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ कार्यकर्ता मदनलाल गुप्त आंदोलन के दिनों के संघर्ष को याद कर आज भी रोमांचित हो जाते हैं।बताया-1992 में उनके साथ कन्हैया बरनवाल, गंगा विश्वकर्मा, रणजीत सिंह और उनका आठ वर्षीय बेटा रोहित, विंदेश्वरी जायसवाल, रामनरेश तिवारी, सिंहासन तिवारी सहित आठ लोग अयोध्या के लिए रवाना हुए। रास्ते में बस्ती के आगे यात्रा करना कठिन हो गया।

मुसीबत की घड़ी में संघ की ओर से गांव के दक्षिण खाली जगह पर लगे सूखे बांस के निकट पहुंचने का निर्देश दिया गया। हरैया में पुलिस ने पकड़ा तो मार भी खानी पड़ी। थाने पहुंचने पर वहां तैनात दरोगा परिचित निकला तो छोड़ दिया गया। पैदल चलकर आठ दिनों में छिपते-छिपाते अयोध्या पहुंचे। किसी तरह पुल पार कर अयोध्या में प्रवेश करने पर छोटी छावनी जाने का निर्देश मिला था। फिर पतंग और चरखी बेचने का नाटक करते हुए मानस मंदिर में शरण ली गई। वहां अशोक सिंघल और रामअशीष राय भी पहुंचे थे। इनके निर्देश पर आठ दिसंबर को कारसेवक प्रभु श्रीराम की सेवा में निकल पड़े।

मदनलाल बताते हैं कि महंथ नृत्य गोपाल दास और परमहंस रामचंद्र की देखरेख में एक साथ 17 कारसेवकों का सरयू नदी तट पर अंतिम संस्कार किया गया था। वह दृश्य आज भी रोंगटे खड़ा कर देता है।

 
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सरयू के तट पर ली थी राम जन्मभूमि को मुक्त कराने की शपथ
रुद्रपुर स्थित दुग्धेश्वरनाथ मंदिर के महंथ रमाशंकर भारती ने राम जन्मभूमि मुक्ति आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाई। उन्होंने ब्रह्मलीन महंथ अवेद्यनाथ के नेतृत्व में देशभर में धर्म संसद और सहभोज का आयोजन कर हिंदुओं को आंदोलन से जोड़ने में सक्रिय योगदान दिया।

आंदोलन के संस्मरणों को याद कर वह भावुक हो जाते हैं। महंथ रमाशंकर भारती ने बताया-बात पांच अप्रैल सन 1987 की है। अयोध्या के सरयू तट पर पांच लाख हिंदू और साधु-संतों की जुटान हुई थी। तब रामजन्म भूमि न्यास के अध्यक्ष जगद्गुरू रामानंदाचार्य थे। वहां जुटे पांच लाख से अधिक रामभक्तों को रामानंदाचार्य ने शपथ दिलाई। उनके मंच पर खड़ा होते ही अयोध्या का सरयू तट जय सियाराम के गगन भेदी जयघोष से गूंजने लगा।

रामभक्तों के समक्ष उन्होंने संकल्प पत्र पढ़ना शुरू किया, जिसे हम सभी ने दोहराया। उस मंच से तब इंडियन मुस्लिम यूथ कांफ्रेस यूपी के अध्यक्ष रहे मुख्तार अब्बास नकवी ने भी शपथ ली थी। उन्होंने कहा था कि अयोध्या हिंदुओं का काबा है और उन्हें इससे वंचित नहीं किया जा सकता। उन्होंने मुसलमानों को अयोध्या मसले पर सकारात्मक सहयोग देने को कहा था। उस अवसर पर लाखों हिंदू समुदाय को रामजन्म भूमि मुक्ति यज्ञ समिति के अध्यक्ष गोरक्षपीठ के महंथ अवेद्यनाथ, चिन्मयानंद, राजमाता विजयाराजे सिंधिया और अयोध्या के संत परमहंस रामचंद्र ने जगाने का काम किया था।
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