संवाद न्यूज एजेंसी देवरिया/भाटपार रानी। समूह लोन का किस्त जमा कराने के लिए माइक्रो फाइनेंस कंपनियों के एजेंट अलग-अलग तरीके से महिलाओं पर दबाव बनाते हैं।
एजेंट लोन लेने वाली महिलाओं की गांव के लोगों के सामने फजीहत करने से नहीं चूकते, ताकि दबाव में आकर महिलाएं किस्त जमा कर दें। बेइज्जती के डर से करमुआ गांव की 20 महिलाएं घर छोड़कर परदेश पलायन कर गई हैं। कर्ज में डूबी महिलाओं का कहना है कि घर भले ही छूटा है, मगर सरेआम जलील तो नहीं होना पड़ रहा है। भाटपार रानी तहसील क्षेत्र के करमुआ गांव की शैल कुमारी पत्नी जालंधर ने जरूरत पड़ने पर एक माइक्रो फाइनेंस कंपनी के एजेंट से समूह लोन लेने की बात कही।
शैल के मुताबिक दूसरे दिन एजेंट ने गांव की एक महिला के घर पर मीटिंग की। आधार कार्ड का फोटो लेकर अंगूठा लगवा लोन दे दिया। प्रत्येक माह तय किस्त जमा कर रही थी। बाद में आर्थिक स्थिति खराब होने की वजह से किस्त जमा करने में देरी होने लगी। एजेंट गांव के लोगों के सामने किस्त जमा करने के लिए फजीहत करने लगा। तंग आकर घर छोड़ना पड़ा।
ग्रामीणों के मुताबिक, इसी गांव की शशि कला देवी ने समूह से 40 हजार रुपये लोन लिया। दो किस्त लैप्स होने पर एजेंट महिला गारंटर के माध्यम से लगातार दबाव बनवा रहा था।
दबाव देख पलायन कर गई। यहीं की मैना देवी 50 हजार रुपये व्यवसाय करने के लिए समूह लोन लिया। पति के मुताबिक, उसी रकम से चार हजार रुपये बीमा के नाम पर एजेंट ने ले लिया। पता किया तो कोई बीमा नहीं हुआ था।
कुछ ही दिन बाद एजेंट किस्त जमा कराने के लिए घर पहुंच गया। उस समय किस्त जमा करने के लिए रुपये नहीं। एजेंट सुबह 10 से रात आठ बजे तक घर के सामने बैठा रहा। आसपास के लोगों को बुलाकर हंगामा करने लगा। यह देख लोगों ने उसे डांटकर भगा दिया। इतना ही नहीं, एजेंटों की धमकी और दबाव से परेशान गांव की उषा देवी, कमरू निशा, कांति देवी, बच्ची देवी, रानी, मीना देवी, रमपतिया देवी, तारा देवी, बेबी देवी, मंजू देवी, पार्वती देवी घर छोड़ दिल्ली, पंजाब और गुजरात आदि शहरों में रह रही हैं।