संवाद न्यूज एजेंसी
देवरिया। लार क्षेत्र के धरहरा गांव में 38 साल पहले गोली मारकर पिता-पुत्र की हत्या कर दी गई थी। परिजनों की तहरीर पर पुलिस ने गांव के 16 लोगों पर हत्या का केस दर्ज किया था। सजा सुनाए जाने के बाद से संवरु फरार चल रहा था।
पुलिस उस पर 25 हजार रुपये का इनाम घोषित कर तलाश कर रही थी। चार अप्रैल को उसने कोर्ट में समर्पण कर दिया। इसकी भनक पुलिस को भी नहीं लग सकी। उसके 38 साल फरार रहने की जानकारी लोगों को हुई तो पुलिस की सक्रियता पर सवाल खड़े होने लगे। बहरहाल उसके समर्पण के बाद पुलिस ने राहत महसूस की है।
लार क्षेत्र के धरहरा गांव में 1980 में रामकिशोर सिंह के खेत में गांव के ही एक शख्स की भैंस फसल को खाने लगी। इस पर उन्होंने समझाते हुए उसे थप्पड़ जड़ दिया। आरोप है कि इससे गुस्साए लोगों ने बेल्थरा घाट के पास रामकिशोर सिंह की चाकू से वार कर हत्या कर दी। इसके बाद प्रतिशोध में दूसरे पक्ष ने 1987 में राधाविनेश यादव और इनके पुत्र वशिष्ठ यादव की गोली मार हत्या कर दी।
तहरीर के मुताबिक 16 लोगों पर हत्या का केस दर्ज कर पुलिस आरोपितों को न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया। सेसन कोर्ट ने 16 लोगों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। इस पर आरोपितों ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर अपील की।
हाईकोर्ट ने आठ लोगों को बरी कर संवरु सहित आठ लोगों की सजा को बरकरार रखा। इसके बाद सात लोगों ने कोर्ट में समर्पण कर दिया। वहीं संवरु को सजा की जानकारी हुई तो वह फरार हो गया। तभी से पुलिस उसकी तलाश कर रही थी।
इसी बीच 16 फरवरी 2019 को 25 हजार का इनाम घोषित कर दिया गया। उसकी गिरफ्तारी को लेकर पुलिस टीम छापेमारी कर रही थी। इसके अलावा परिजनों पर भी दबाव बना रही थी। इसे देख चार अप्रैल को उसने कोर्ट के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया।